रानीखेत (अल्मोड़ा)। नर्स स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ होती है लेकिन रानीखेत उप जिला चिकित्सालय में इनकी कमी है। एक लाख की आबादी को यह केंद्र इलाज उपलब्ध कराता है। 100 बेड के इस अस्पताल में स्टाफ नर्स के 75 प्रतिशत पद रिक्त हैं। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करना मुश्किल है जिससे लोग समस्याओं का सामना कर रहे हैं। दवा, इंजेक्शन सहित आपातकालीन कक्ष में सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
100 बेड के रानीखेत उप जिला चिकित्सालय में स्टॉफ नर्स से 22 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष यहां सिर्फ सात नर्स तैनात हैं। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर कर मरीजों को राहत पहुंचाना अस्पताल प्रबंधन के लिए चुनौती बन गया है। जच्चा-बच्चा की देखभाल करने के लिए स्टॉफ नर्स नहीं हैं तो इनकी कमी से आपातकालीन सेवा भी प्रभावित हो रही है। दुर्घटना में घायलों की समय रहते मरहम-पट्टी करना भी मुश्किल हो रहा है। इन हालात में तीमारदार खुद मरीजों की देखभाल करने के लिए मजबूर हैं। संवाद
नर्स की कमी से आईसीयू संचालन करना भी मुश्किल
रानीखेत। उप जिला चिकित्सालय में चार बेड का आईसीयू स्थापित है। स्टााफ नर्स की कमी से इसका संचालन करना भी मुश्किल हो रहा है। प्रशिक्षित नर्स न होने से कई बार मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर औपचारिकता निभा दी जाती है।
निश्चित तौर पर स्टॉफ नर्स की कमी से कार्य प्रभावित हो रहे हैं। इस बारे में उच्चाधिकारियों को सूचना भेजी गई है।
डॉ. संदीप दीक्षित, चिकित्सा अधीक्षक, उप जिला चिकित्सालय, रानीखेत।