अल्मोड़ा। पर्वतीय क्षेत्रों के अस्पतालों में चिकित्सकों की कमी दूर होती नहीं दिख रही है। डॉक्टर पहाड़ आने से कतरा रहे हैं और यहां के अस्पतालों से दूरी बनाने लगे हैं। अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में हुई फैकल्टी की नियुक्ति और तैनाती इसका प्रमाण है। यहां बीते दिनों 63 फैकल्टी की नियुक्ति हुई थी। इसके सापेक्ष सिर्फ 13 फैकल्टी ने ही तैनाती ली और 50 ने यहां का रुख नहीं किया।
अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज के संचालन को दो साल हो गए हैं लेकिन यहां फैकल्टी की अब भी कमी है जो दूर होने का नाम नहीं ले रही है। अब भी यहां 40 प्रतिशत फैकल्टी की दरकार है। बीते दिनों शासन स्तर पर हुए साक्षात्कार के बाद यहां 60 असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति हुई है। दो माह बाद भी इसमें से सिर्फ 15 विशेषज्ञों ने ही तैनाती ली है और 50 ने नियुक्ति के बाद भी यहां तैनाती लेने से परहेज किया है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के मुताबिक अब उनके यहां तैनाती लेने की उम्मीद भी कम है।
कॉलेज प्रबंधन के मुताबिक डॉक्टर पहाड़ चढ़ने से कतरा रहे हैं और मैदानी क्षेत्रों के अस्पतालों में सेवा देना उन्हें रास आ रहा है। ऐसे में मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के लिए फैकल्टी की कमी को दूर करना किसी चुनौती से कम नहीं है।
महिला रोग विशेषज्ञों की भारी कमी
अल्मोड़ा। मेडिकल कॉलेज में महिला रोग जैसे महत्वपूर्ण विभाग में फैकल्टी की भारी कमी है। यहां इस विभाग में आठ विशेषज्ञों की तैनाती होनी है। इसके सापेक्ष केवल तीन विशेषज्ञ ही अपनी सेवा दे रहे हैं। इसका सीधा असर महिला स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। बगैर फैकल्टी के किसी तरह कॉलेज प्रबंधन महिलाओं और गर्भवतियों को राहत पहुंचाने की जद्दोजहद में जुटा है।
नियुक्ति के सापेक्ष फैकल्टी ने तैनाती नहीं ली है। संविदा पर फैकल्टी की कमी को पूरा करने के लिए हर माह साक्षात्कार हो रहे हैं। इसके बाद भी मेडिकल कॉलेज में पहुंचने वाले मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके, यह प्रयास जारी है।
प्रो. सीपी भैंसोड़ा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज, अल्मोड़ा।