अल्मोड़ा/सोमेश्वर। लोक प्रबंध विकास संस्था की ओर से ताकुला-बसौली घाटी के वन पंचायत सरपंचों और पंचों की ईनाकोट में कार्यशाला हुई। वक्ताओं ने वन पंचायत के सम्मुख आ रही समस्याओं पर चर्चा कर उनके समाधान के उपायों पर विमर्श किया। सरपंचों ने कहा कि लीसा रॉयल्टी की धनराशि तत्काल ब्याज सहित अवमुक्त की जाए। वहीं, सोमेश्वर में भी पंचों ने यही मांग दोहराई।
वक्ताओं ने माइक्रोप्लान की अनिवार्यता समाप्त करने, सरपंचों और पंचों को मानदेय देने, पंचायती वनों का सीमांकन करने, अतिक्रमण हटाने के साथ ही वन पंचायतों को वनाधिकार कानून के दायरे में लाने की मांग की।
ईश्वर जोशी ने वन पंचायत नियमावली के विभिन्न प्रावधानों और माइक्रोप्लान की जानकारी दी। सरपंच संगठन के सचिव दिनेश लोहनी ने माइक्रोप्लान निर्माण में वन विभाग का सहयोग न मिलने पर आक्रोश जताया।
सरपंच संगठन के अध्यक्ष डुंगर सिंह भाकुनी ने संगठन को मजबूत बनाने की वकालत की। सरपंच जया कांडपाल ने पंचायती वनों के विकास में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया। सरपंच देवेंद्र सिंह और बहादुर सिंह ने जायका के अनुभवों को साझा किया।
बैठक में तय किया गया कि शीघ्र ही एक शिष्ठमंडल प्रभागीय वनाधिकारी से मुलाकात कर उन्हें समस्याओं से अवगत कराएगा। बैठक में सरपंच इंद्रा देवी, नंदी देवी, गंगा पांडे, दीवान सिंह, महेंद्र सिंह, पूरन सिंह, जगदीश बिष्ट, दीप्ति भोजक, सुरेश सिंह आदि ने विचार रखे। इधर, सोमेश्वर में वन पंचायत सरपंचों की बैठक में वक्ताओं ने वन पंचायत की लीसा रायल्टी वन पंचायत के खातों में डालने की मांग की। उन्होंने कहा कि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने को बाध्य होंगे। अध्यक्षता सोमेश्वर वन पंचायत संगठन अध्यक्ष विनोद पांडे और संचालन महामंत्री लीला बोरा ने किया। वहां पर लाल सिंह खाती, बसंत कैड़ा, दिनकर जोशी, अमर सिंह, मोहन गिरी, जीत सिंह, गोविंद रावत, हरीश गिरी आदि थे।