चौखुटिया (अल्मोड़ा)। लचर स्वास्थ्य सुविधाओं के खिलाफ राम गंगा नदी के घाट पर आमरण अनशन जारी रहा। 80 वर्षीय नारायण मेहरा और पवन सिंह मेहरा आमरण अनशन पर डटे रहे। चितैली के ग्राम प्रधान बालम सिंह नेगी , कविता मनराल, योगिता मनराल, हरीश कुमार, चंदन सिंह, हरीश जोशी , कमल सिंह नेगी, गोपाल सिंह क्रमिक अनशन पर बैठे।
आमरण अनशन स्थल पर हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि सरकार ने अभी तक ठोस कदम नहीं उठाए हैं, जबकि चौखुटिया क्षेत्र को उप जिला चिकित्सालय का दर्जा देने के बावजूद सुविधाएं धरातल पर नहीं पहुंची हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो यह आंदोलन राज्यव्यापी रूप ले सकता है। इधर चौखुटिया से 24 अक्तूबर को प्रारंभ हुई पदयात्रा रविवार को आदिबद्री होते हुए कर्णप्रयाग पहुंची, जहां स्थानीय नागरिकों, समाजसेवियों और युवाओं ने पदयात्रियों का जोरदार स्वागत किया। पदयात्रा के दौरान आंदोलनकारियों ने जगह-जगह जनसभाएं की। लोगों से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाल स्थिति पर खुलकर चर्चा की। वहां जीवन सिंह नेगी, अशोक कुमार, नवीन जोशी, कुंवर सिंह, विपिन शर्मा, आनंद किरौला आदि बैठे।
सीएचसी चौखुटिया में व्यवस्था बढ़ाई, धैर्य रखे लोग: शर्मा
चौखुटिया में चल रहे स्वास्थ्य आंदोलन के दृष्टिगत जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने में जुटा हुआ है। मुख्य विकास अधिकारी रामजी शरण शर्मा ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सीएचसी चौखुटिया में व्यवस्थाओं को बढ़ाया गया है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में सीएचसी चौखुटिया में सात एमबीबीएस डॉक्टर समेत कुल 9 चिकित्सक कार्यरत है। सचिव स्वास्थ्य के निर्देशानुसार पूर्व में माह में दो दिन को बढ़ाते हुए सप्ताह में तीन दिवस (मंगलवार, बृहस्पतिवार एवं शनिवार) को रोस्टर के अनुसार विशेषज्ञ चिकित्सकों गायनी एवं बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती की गई। सीएचसी चौखुटिया को 30 बेड से 60 बेड किए जाने का शासनादेश भी हो गया है। कुछ समय बाद सभी कार्य धरातल पर उतर जाएंगे तथा लोगों को उनका लाभ मिलेगा। उन्होंने लोगों से अपील की है कि कुछ समय धैर्य रखने की जरूरत है, सरकार और जिला प्रशासन लगातार जनहित में कार्यरत है।
सीएचसी चौखुटिया में अक्तूबर में 13 केस हुए ट्रांसफर
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. नवीन चंद्र तिवारी ने बताया कि माह अक्तूबर में सीएचसी चौखुटिया में 1689 मरीजों का उपचार हुआ। इनमें से से मात्र 13 केस ट्रांसफर हुए जो कि कुल केस का मात्र एक प्रतिशत से भी कम है। अप्रैल से अभी तक कुल 20615 लोगों का उपचार किया जिसमें 117 मरीजों को रेफर किया गया है जो कि मात्र 0.5 प्रतिशत है। रेफर केसों के बारे में मुख्य चिकित्साधिकारी ने कहा कि कई बार दूर-दराज से मरीजों को गंभीर अवस्था में लाया जाता है। उन्हें गहन चिकित्सा के लिए हायर सेंटर ट्रांसफर किया जाना होता है जो मरीजों के लिये ही लाभदायक होता है।