अल्मोड़ा। गोपाल बाबू गोस्वामी सांस्कृतिक कला समिति की ओर से यहां हुए सूक्ष्म कार्यक्रम में प्रसिद्ध लोक गायक स्वर सम्राट स्व. गोपाल बाबू गोस्वामी की पुण्यतिथि कोविड-19 के चलते सादगी से मनाई गई। स्व. गोस्वामी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। वक्ताओं ने कहा कि भले ही गोपाल बाबू आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनके गीत उनकी उपस्थिति का अहसास कराते हैं।
उन्होंने कहा कि गोपाल बाबू गोस्वामी के गाए गीत कैले बजे मुरूली ओ बैणा ऊंचा नीचा डान्यूं मां..., आमे की डाली मां घुघती नी बासा.., रंगीलो गढ़ देशो मेरो छबीलो कुमाऊं..., ओ भिना कसिक जानू दोरिहाटा.. समेत कई गीत आज भी लोग गुनगुनाते हैं। विवाह समारोहों में भी गोपाल बाबू गोस्वामी के गीत बजते हुए सुनाई देते हैं। 26 नवंबर 1996 को आज के ही दिन नैनीताल के बीडी पांडे अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली थी।
इससे पूर्व स्व. गोस्वामी की पत्नी चंद्रा गोस्वामी ने गोपाल बाबू गोस्वामी की पुण्य तिथि पर पुष्पांजलि अर्पित की। इस मौके पर स्व. गोस्वामी के ज्येष्ठ पुत्र आशीर्वाद गोस्वामी, अमित गोस्वामी, पुत्री अभिलाषा गोस्वामी, पुत्रवधु चंद्रा गोस्वामी, पौत्र अरमान गोस्वामी, कलावती चौहान, रीकी भट्ट, गोपाल चम्याल, राजू चौहान, गोपाल भट्ट, सुनील भट्ट, मनोज खुल्बे, आशा भोजक, दुर्गा सिंह भोजक, चंद्रशेखर, रमेश लाल आदि मौजूद थे।