चौखुटिया, मासी और स्याल्दे सहित करीब 175 गावों में विद्युत आपूर्ति 36 घंटे तक ठप रही। इस दौरान पेयजल आपूर्ति सहित सारे काम काज प्रभावित होने से पूरे क्षेत्र में हा-हाकार जैसी स्थिति पैदा हो गई। एसडीओ ने बताया कि मंचौड़ा सहित दो स्थानों पर इंसुलेशन डिस्क फटने से व्यवधान पैदा हुआ।
चौखुटिया, मासी व स्याल्दे सहित इससे जुड़े करीब175 गावों में विद्युत आपूर्ति 36 घंटे बाद सुचारु हो पाई। लोगों ने एक पूरा दिन और दो रातें बगैर बिजली के बिताईं। पूरे क्षेत्र में शुक्रवार की रात करीब 9.30 बजे विद्युत आपूर्ति ठप हो गई थी, जो तीसरे दिन रविवार को सुबह साढ़े नौ बजे सुचारु हो पाई।
इस दौरान संबंधित क्षेत्र की तमाम पेयजल योजनाओं में पेयजल आपूर्ति ठप होने से लोग पेयजल को लेकर भी तरसते रहे, जबकि लोगों के इंन्वटर व मोबाइल की बैटरियां भी जवाब दे गए जिससे लोगों के मोबाइल भी बंद पड़ गए। इस दौरान बिजली पर निर्भर व्यवसायियों व कार्यालयों का कार्य भी प्रभावित रहा। इतने लंबे अंतराल तक बिजली गुल रहने से लोगों को परेशानियां झेलनी पड़ीं।
इधर विभाग के एसडीओ सौरभ जोशी ने बताया कि मंचौड़ा के निकट मकरों गधेरे में डिस्क इंसूलेटर फट गए थे। ग्वाड़ गार्डन में भी लाइन खराब हो गई थी। दो स्थानों पर फाल्ट होने से आपूर्ति सुचारु करने में समय लगा।
चौखुटिया व स्याल्दे तहसील क्षेत्रों में 36 घंटे बिजली ठप रहने से कई पेयजल योजनाओं में पेयजल आपूर्ति ठप रही, जिनमें चौखुटिया नागर पेयजल योजना, भटकोट पेयजल योजना, द्वाराहाट पेयजल योजना, नैथना देवी योजना, मोहणा मल्ला योजना, सदे नहर गांव योजना, तिमली-चचरोटी तथ मगडुखाल आदि पेयजल योजनाएं शामिल हैं। उक्त योजनाओं के ठप रहने से तमाम गावों में पेयजल का संकट बना रहा।
चौखुटिया उपकेंद्र को द्वाराहाट लाइन से जोड़कर क्षेत्र में बिजली की वैकल्पिक व्यवस्था की जा सकती थी। आपदा के दौरान भी इस तरह की व्यवस्था की गई थी। इससे कम से कम पेयजल योजनाएं तो बाधित नहीं होतीं परंतु विभाग के उच्च अधिकारियों ने इस ओर ध्यान देने की जरूरत नहीं समझी।
इस बावत कनिष्ठ अभियंता महिपाल सिंह का कहना है कि द्वाराहाट लाइन से चौखुटिया को जोड़ने में पूरे पांच घंटे का समय लगता है फिर लाइन काटने में भी इतने ही घंटे लगते। इसलिए इस ओर ध्यान नहीं दिया गया।