अल्मोड़ा। नगर क्षेत्र में बंदरों का आतंक बढ़ गया है। बंदर जहां खेती की नुकसान पहुंचा रहे हैं वहीं राह चलते लोगों पर हमला कर रहे हैं। ऐसे में लोगों में दहशत है तो किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है।
नगर के खत्याड़ी, दुगालखोला, रानीधारा, पूर्वी पोखरखाली, पश्चिमी पोखरखाली, ढूंगाधारा, सरकार की आली, नृसिंहबाड़ी आदि इलाकों में बंदरों का आतंक बढ़ गया है। बंदर लोगों के घरों में घुसने के साथ ही राह चलते लोगों के हाथों से सामान छीनते हुए उन पर हमला भी कर रहे हैं। बीते एक माह में बंदरों के हमले से घायल सात से अधिक लोग जिला अस्पताल में इलाज करा चुके हैं।
स्कूल जाने वाले बच्चों पर भी बंदर हमला कर रहे हैं जिससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में बंदर फसल, सब्जियों को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे किसानों की मेहनत बर्बाद हो रही है। ईओ नगर पालिका भरत त्रिपाठी ने कहा कि बंदरों का बधियाकरण कर उन्हें जंगलों में छोड़ने की योजना है। जल्द इस संबंध में जरूरी कदम उठाए जाएंगे। संवाद
पर्यटन सीजन में लावारिश पशुु बन रहे यात्रियों के लिए परेशानी
रानीखेत (अल्मोड़ा)। नगरवासियों को लावारिस जानवरों से निजात नहीं मिल पा रही है। बाजार में जानवर धड़ल्ले से घूम रहे हैं जिस कारण यातायात व्यवस्था प्रभावित हो जाती है। छावनी परिषद ने सार्वजनिक क्षेत्र में घूमने वाले टैग लगे पशुओं के पालकों पर जुर्माने की कार्रवाई शुरू की। कई ग्रामीणों पर पांच सौ रुपये तक का जुर्माना भी किया गया लेकिन बाजार में लावारिस जानवरों की संख्या में कमी नहीं आ पा रही है। पर्यटन सीजन शुरू होने से पर्यटकों को भी लावारिश जानवरों की वजह से काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
रानीखेत में पर्यटकों की आवाजाही धीरे-धीरे बढ़ने लगी है लेकिन नगर की व्यवस्थाएं सुधरने का नाम नहीं ले रही हैं। यातायात व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो पा रहा है। रही सही कसर लावारिस जानवरों ने पूरी कर दी है। बाजार में पशुओं की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है। जानवरों के घूमने के कारण वाहन चालकों के साथ ही पैदल यात्रियों को परेशानी हो रही है। कभी-कभी जाम भी लग रहा है। कई दोपहिया वाहन चालक इन जानवरों के कारण चोटिल तक हो चुके हैं।
पूर्व में छावनी परिषद ने बीट ऑफ ड्रम कर नगर में पशुपालकों से जानवरों को नहीं छोड़ने की हिदायत दी थी। छावनी परिषद के स्वच्छता निरीक्षक एपी सिंह ने बताया कि टैग लगे पशुुओं को लावारिस छोड़ने वालों पर छावनी परिषद ने जुर्माने की कार्रवाई की है। इधर लावारिस जानवरों को गो सदन भेजने के लिए बात हुई है। सामाजिक कार्यकर्ता रामेश्वर गोयल का कहना है कि छावनी परिषद को लावान्सश जानवरों के लिए गंभीरता से अभियान चलाना चाहिए।