वित्त आयोग की संस्तुतियों के आधार पर जिला, क्षेत्र पंचायतों को देय बजट न मिलने से पंचायत प्रतिनिधियों में केंद्र सरकार के प्रति रोष है। इससे नाराज जिला पंचायत, बीडीसी सदस्यों ने जिला पंचायत, विकास भवन कार्यालयों में प्रदर्शन कर ताले ठोक दिए। इसके बाद वह कलक्ट्रेट पहुंचे। वहां हुई सभा में वक्ताओं ने प्रतिनिधियों से 13 जनवरी को देहरादून में प्रस्तावित प्रदर्शन में पहुंचने का आह्वान किया। डीएम सविन बंसल के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा।
पंचायत प्रतिनिधियों ने पूर्वाह्न में जिला पंचायत और इसके बाद विकास भवन परिसर के गेट पर नारेबाजी कर ताले जड़ दिए। इसके बाद कलक्ट्रेट प्रांगण में हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के समय में जिला और क्षेत्र पंचायतों को वित्त आयोग की धनराशि मिली थी, अब केंद्र की मोदी सरकार ने यह राशि नहीं दी है। बजट न मिलने से विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार पर पंचायत विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। कहा कि प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी के कार्यकाल में त्रिस्तरीय पंचायतों को मजबूत बनाने को पंचायती राज व्यवस्था लागू की थी। तब से केंद्र सरकार तीनों पंचायतों को वित्त आयोग की धनराशि जारी करती रहीं हैं। वर्तमान में केंद्र सरकार ने 14वें वित्त के बजट से जिला, क्षेत्र पंचायतों को धनराशि देना बंद कर दिया है।
उन्होंने कहा कि केंद्र की पंचायत विरोधी नीति के खिलाफ देहरादून में 13 जनवरी को प्रदर्शन होगा। जिसमें शामिल होने के लिए जिले के पंचायत प्रतिनिधि 12 जनवरी को अल्मोड़ा से कूच करेंगे।
इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष पार्वती महरा, प्रमुख संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष पीतांबर पांडे, शिवेंद्र रावत, आनंदी पांडे, विमला बनौला, राधा पांडे, विशन सिंह, लता आर्या, बलवंत सिंह, सुनीता बोरा, तारा भाकुनी, भावना अधिकारी, मोहन सिंह महरा, कृष्ण सिंह बिष्ट, प्रमुख हरीश बनौला, निर्मला आर्या, चंदन राम, महेश आर्या, अमित पांडे आदि शामिल थे।