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बाहरी उद्योगपतियों के पुरजोर विरोध करेगा उक्रांद: पुष्पेश

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पुष्पेश त्रिपाठी। - फोटो : AMAR UJALA
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द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। केंद्र सरकार के एमएसएमई पैकेज से बड़ी राहत मिलने की आशा है। जहां सरकार की मंशा यहां की बंजर भूमि पर कृषि, फसल, हार्टिकल्चर आदि के नाम पर पैसा जारी करने की है। वहीं उक्त पैसा स्थानीय लोगों को देने के बजाय वह बाहरी लोगों को आमंत्रित कर यहां की भूमि उन्हें लीज पर या खरीद पर देने की तैयारी कर रही है। जिसका उत्तराखंड क्रांति दल ने विरोध करते हुए कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। इस प्रकरण पर उक्रांद के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने बाहरी लोगों अथवा उद्योगपतियों को छूट देने की प्रक्रिया को उत्तराखंड के मूल निवासियों को बाहर भगाने की साज़िश करार दिया है। त्रिपाठी ने बाहरी लोगों अथवा उद्योगपतियों को यहां की भूमि सोंपे जाने की जुगत का कड़ा विरोध जताया। कहा, सरकार जो पैसा उद्योगपतियों या बाहरी लोगों को लीज के नाम पर खर्च करवाना चाहती है, उसे यहां के काश्तकारों, भूमि मालिकों को अथवा समितियों, सहकारिता के माध्यम से समूह बनाकर सीधे यहां के ग्रामीणों के माध्यम से क्रियान्वित करवाए।इसके लिए नीतियां व योजना तैयार कर उनके माध्यम से उत्पादन शुरू करवाए। इन बाहरी उद्योगपतियों को जमीन देने के बजाय सरकार को चाहिए कि वह स्थानीय काश्तकार द्वारा कृषि, जडी़ बूटी, हार्टिकल्चर, फल आदि के क्षेत्रों में उत्पादित सामग्री को खरीदने के लिए बाहरी लोगों को आमंत्रित करे तब जाकर कहीं यह स्पष्ट हो पायेगा कि वास्तव में सरकार की मंशा राज्य के विकास की है। त्रिपाठी ने बेशकीमती जमीन को पूंजीपतियों के हाथ सौंपने के बजाय हार्टिकल्चर, कृषि, आयुष आदि विभागों के जरिए क्षेत्र के लोगों से फल, जड़ी-बूटी, आयुष आदि का उत्पादन कराए। इसके लिए स्थानीय स्तर पर योजना के क्रियान्वयन को लेकर नीतियां बनाई जाएं, तभी केन्द्र सरकार के पैकेज का उत्तराखंड वासियों को फायदा मिल सकेगा। उन्होंने कहा यदि इस तरह का कार्य सरकारों ने पूर्व से किया होता तो यहां के हालात आज कुछ और ही होते। द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। केंद्र सरकार के एमएसएमई पैकेज से बड़ी राहत मिलने की आशा है। जहां सरकार की मंशा यहां की बंजर भूमि पर कृषि , फसल, हार्टिकल्चर आदि के नाम पर पैसा जारी करने की है। वहीं उक्त पैसा स्थानीय लोगों को देने के बजाय वह बाहरी लोगों को आमंत्रित कर यहां की भूमि उन्हें लीज पर अथवा खरीद पर देने की तैयारी कर रही है।जिसका उत्तराखंड क्रांति दल ने विरोध करते हुए कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। इस प्रकरण पर उक्रांद के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक पुष्पेश त्रिपाठी ने बाहरी लोगों अथवा उद्योगपतियों को छूट देने की प्रक्रिया को उत्तराखंड के मूल निवासियों को बाहर भगाने की साज़िश करार दिया है। त्रिपाठी ने बाहरी लोगों अथवा उद्योगपतियों को यहां की भूमि सोंपे जाने की जुगत का कड़ा विरोध जताते हुए कहा है कि, सरकार को चाहिए कि, सरकार जो पैसा उद्योगपतियों या बाहरी लोगों को लीज के नाम पर खर्च करवाना चाहती है उसे यहां के काश्तकारों,भूमि मालिकों को अथवा समितियों,सहकारिता के माध्यम से समूह बनाकर सीधे सीधे यहां के ग्रामीणों के माध्यम से क्रियान्वित करवाए।इसके लिए नीतियां व योजना तैयार कर उनके माध्यम से उत्पादन शुरू करवाए। दूसरा इन बाहरी उद्योगपतियों को जमीन देने के बजाय सरकार को चाहिए कि,वह स्थानीय काश्तकार द्वारि कृषि,जडी़ बूटी, हार्टिकल्चर ,फल आदि के क्षेत्रों में उत्पादित सामग्री को खरीदने के लिए बाहरी लोगों को आमंत्रित करे तब जाकर कहीं यह स्पष्ट हो पायेगा कि, वास्तव में सरकार की मंशा राज्य के विकास की है। त्रिपाठी ने यहां की बेशकीमती जमीन को पूंजीपतियों के हाथ सोंपने के बजाय हार्टिकल्चर,कृषि,आयुष आदि जितने भी विभाग हैं। सरकार से उन सभी विभागों को निर्देश दिए जाने पर जोर दिया है कि, उस क्षेत्र के लोग फल, जड़ी-बूटी,आयुष आदि जिसका उत्पादन कर सकते हों समिति या सहकारिता के माध्यम से करें। इसके लिए स्थानीय स्तर पर योजना के क्रियान्वयन को लेकर नितियां बनाई जाए, तभी केन्द्र सरकार के पैकेज का उत्तराखंड वासियों को फायदा मिल सकेगा।उन्होंने कहा कि,यदि इस तरह का कार्य सरकारों ने पूर्व से किया होता तो यहां के हालात आज कुछ और ही होते।
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