उत्तराखंड जूनियर हाइस्कूल शिक्षक संघ जिला इकाई की बैठक में वक्ताओं ने शिक्षकों को डीएलएड और ब्रिज कोर्स कराने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2001 के बाद नियुक्त शिक्षकों को विभाग द्वारा अप्रशिक्षित मानकर डीएलएड एवं ब्रिज कोर्स कराया जा रहा है। जबकि सरकार और विभाग द्वारा पूर्व में प्रशिक्षण देकर नियुक्ति प्रदान कर चयन और पदोन्नति शिक्षकों को दी गई है। 17 साल बाद प्रशिक्षकों को अप्रशिक्षित मानना न्यायोचित नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार और विभाग अपनी कमियों को छिपाने के लिए कोर्स कराने और सेवाएं समाप्त करने के आदेश समय-समय पर दे रही है जो शिक्षकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने मूल्यांकन की दोहरी प्रणाली पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा बेसिक स्कूलों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है। बेसिक और माध्यमिक विद्यालयों की परीक्षा प्रणाली के मूल्यांकन में दोहरी व्यवस्था अपनाई जा रही है। एक तरफ माध्यमिक विद्यालयों में अंकों के आधार पर मूल्यांकन किया जा रहा है वहीं दूसरी तरफ बेसिक में संकेतकों के आधार पर मूल्यांकन किया जा रहा है। सभी जिलो के स्कूलों में एक जैसा मूल्यांकन हो। सर्व शिक्षा के विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को समय पर वेतन का भुगतान किया जाए।
उन्होंने जूनियर हाइस्कूल के प्रधानाध्यापक पद पर शत-प्रतिशत पदोन्नति करने, जूनियर हाइस्कूल के शिक्षकों की वरिष्ठता सूची जारी करने, सभी विकास खंडों में सर्विस बुक और जीपीएफ पास बुक प्रति वर्ष शिक्षकों को दिखाने की मांग की। उन्होंने कहा कि वर्ष भर के क्रिया कलापों के लिए सत्र के आरंभ में ही शैक्षिक कलेंडर जारी किया जाए। अध्यक्षता जिला अध्यक्ष विनोद थापा ने और संचालन संजय सिंह बिष्ट ने किया। बैठक में शिव राम टम्टा, धन सिंह बिष्ट, पंकज पांडे, भुवन जोशी, पुष्कर सिंह, नवीन बिष्ट आदि मौजूद थे। इससे पूर्व संगठन का एक शिष्टमंडल जिला शिक्षाधिकारी (प्राथमिक शिक्षा) तथा सर्व शिक्षा अभियान के वित्त अधिकारी से मिला और उन्हें समस्या बताई।