सरकार कुकुरमुत्तों की तरह डिग्री कालेज खोलती जा रही है, लेकिन संसाधनों के अभाव और अन्य कारणों से इन कालेजों में छात्र-छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल पा रही है।
पिछले साल भतरौंजखान में खोले गए राजकीय महाविद्यालय में भी प्राचार्य के अलावा सिर्फ तीन शिक्षक तैनात हैं। इस महाविद्यालय में पिछले साल बीए प्रथम वर्ष में 63 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया था, लेकिन इसमें से सिर्फ 15 उत्तीर्ण हो पाए। हालांकि इस साल 83 छात्र-छात्राओं ने प्रवेश लिया है।
राजकीय महाविद्यालय भतरौंजखान में सिर्फ बीए तक की पढ़ाई हो रही है। बीए में भी हिंदी, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, संस्कृत, राजनीति विज्ञान विषय ही उपलब्ध हैं। इनमें हिंदी, संस्कृत और राजनीति विज्ञान विषय के प्रवक्ताओं के पद खाली हैं।
स्थानीय लोग इतिहास, भूगोल और गृह विज्ञान विषय शुरू करने की मांग भी कर रहे हैं, लेकिन अभी तक यह विषय मंजूर नहीं हुए हैं। करीब दो माह पहले मुख्यमंत्री हरीश रावत ने क्षेत्र भ्रमण के दौरान गृह विज्ञान शुुरू करने की घोषणा की थी लेकिन अभी तक यह विषय भी मंजूर नहीं हुआ है।
इधर क्षेत्र के अभिभावकों का कहना है कि महाविद्यालय में बीएससी और बीकॉम की कक्षाएं भी शुरू की जाएं ताकि छात्र-छात्राओं को इसके लिए बाहर नहीं जाना पड़े। फिलहाल यह महाविद्यालय किराए के भवन में चल रहा है, लेकिन नए भवन के निर्माण के लिए जमीन मिल गई है।
प्राचार्य डा.जीएस रावत ने बताया कि नए भवन के निर्माण के लिए दनपौ में 100 नाली भूमि चयनित कर ली गई है। उन्होंने कहा कि शासन से धनराशि मंजूर होने के बाद नए भवन का निर्माण शुरू हो जाएगा।