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50 हजार की आबादी की नब्ज टटोल रहे मात्र चार डॉक्टर

Sat, 21 Apr 2018 11:23 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो  मौलेखाल (अल्मोड़ा)।
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उत्तराखंड बनने के  बाद 17 सालों में प्रदेश में कई सरकारें आईं और गईं, लेकिन किसी ने भी पहाड़ के दुर्गम क्षेत्रों में बदहाल स्वास्थ्य सुविधाएं सुधारने के लिए काम नहीं किया। सल्ट विकासखंड में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति काफी खराब है। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी हरि दत्त वैद्य सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र देवायल में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल है।

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अस्पताल में डॉक्टरों के स्वीकृत नौ पदों में से पांच पद खाली हैं। इसके अलावा अन्य कर्मचारियों के नौ पद रिक्त हैं। अस्पताल में एक्स रे, अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी आदि सुविधाएं नहीं हैं। सुविधाएं नहीं होने के कारण क्षेत्र के लोगों को 60 से 120 किमी दूर रामनगर के अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस कारण 50 हजार से अधिक  की आबादी परेशान है।  

स्वास्थ्य केंद्र देवायल में डॉक्टरों के नौ पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में प्रभारी चिकित्साधिकारी, हड्डी रोग विशेषज्ञ, महिला रोग विशेषज्ञ, आंख, कान, गला रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ के पद खाली हैं। इसके अलावा लैब तकनीशियन,  एएनएम, सुपरवाइजर, चालक, एक्सरे तकनीशियन, वार्ड ब्वाय के दो, सफाई कर्मी के दो पद काफी लंबे समय से खाली हैं।
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इस अस्पताल का 2009 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उच्चीकरण किया गया। अस्पताल में दस बेड की सुविधाएं हैं। दूरस्थ इलाके में स्थित इस अस्पताल में एक्स रे, अल्ट्रासाउंड, पैथोलॉजी जैसी सामान्य सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं है। महिला और बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने के कारण प्रसव पीड़ित महिलाओं को हायर सेंटर रेफर कर दिया जाता है। कई बार महिलाओं की जान पर बन आती है।  

अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी के कारण झिमार, पैसिया, कालीगांव, जालीखान, मौलेखाल, भ्याड़ी, शशिखाल, मुनड़ा, कटरिया, पितना, दाडिमी, चांच, झरगांव, फला, तलाड़, सदरखोला, घसकोट, खुमाड, औलेख समेत आसपास के तमाम गांवों से काफी संख्या में प्रतिदिन रोगी आते हैं लेकिन डॉक्टरों और उपकरणों की कमी के कारण उन्हें पर्याप्त उपचार नहीं मिल पता है।

स्थिति यह है कि मामूली घटना होने पर रोगियों को हायर सेंटर रेफर किया जाता है। इस कारण 50 हजार से अधिक की आबादी को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अस्पताल के उच्चीकरण के बाद क्षेत्रीय लोगों को अस्पताल में बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद थी लेकिन स्थिति में सुधार नहीं आया है। 

सीएचसी में पानी की व्यवस्था तक नहीं है 

करोड़ों रुपये खर्च कर 2011 में अस्पताल का आलीशान भवन बनाया गया। स्थिति यह है कि अस्पताल में पानी की कोई व्यवस्था तक नहीं है। पानी नहीं होने के कारण अस्पताल स्टाफ और रोगियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

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