अल्मोड़ा। जहां एक तरफ लोग बंदर और सुअरों के आतंक के चलते खेतीबाड़ी छोड़ रहे हैं वहीं निकटवर्ती दाड़िमखोला गांव के लोगों ने सामूहिक प्रयासों से प्याज, लहसुन की उपज को बंदरों के नुकसान से बचाकर मिसाल पेश की है। गांव के सभी 160 परिवारों में से रोज पांच लोग बारी-बारी से पूरे दिन बंदर भगाने में जुटे और उन्होंने बंदरों को खेतों में नहीं फटकने दिया। नतीजतन इस बार गांव में कुल मिलाकर करीब 125 क्विंटल से अधिक प्याज, लहसुन का उत्पादन हुआ है। इस उपलब्धि से ग्रामीण खुश हैं और उन्होंने आगे भी जोरशोर से खेती में जुटने का संकल्प लिया है।
अल्मोड़ा से करीब किमी दूर स्थित दाड़िमखोला गांव में करीब 160 परिवार रहते हैं। इनमें अधिकतर छोटे किसान हैं और आज भी किसी ने खेती नहीं छोड़ी है लेकिन पिछले कुछ सालों से बंदरों, सुअरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने से लोगों का खेतीबाड़ी से मोहभंग होने लगा है। पिछले कुछ सालों से कई इलाकों में किसान प्याज, लहसुन सहित अन्य उपज उगाने से बच रहे हैं लेकिन इस बार दाड़िमखोला के लोगों ने एकजुट होकर बंदरों से मुकाबला करने का निर्णय लिया। दाड़िमखोला के किसानों के खेत एक ही क्षेत्र में हैं।
इसलिए उन्होंने बैठक करके तय किया कि इस बार हर किसान प्याज, लहसुन के पौधे लगाएंगे। करीब तीन-चार माह पहले प्याज, लहसुन के पौधे लगाने के बाद उन्होंने बारी-बारी से चौकीदारी करने का फैसला किया। ग्राम प्रधान देवेंद्र सिंह नयाल, सामाजिक कार्यकर्ता महेंद्र सिंह नयाल ने बताया कि प्याज, लहसुन की उपज को बंदरों के नुकसान से बचाने के लिए 160 परिवारों के पांच-पांच लोग बारी से पूरे दिन खेतों में चौकीदारी करते रहे। इसका फायदा यह हुआ कि एक परिवार की चौकीदारी की बारी कई दिन बाद आती थी।
उन्होंने बताया कि सामूहिक प्रयासों से बंदर प्याज, लहसुन की उपज को बिल्कुल नुकसान नहीं पहुंचा सके। महेंद्र सिंह नयाल ने बताया कि पिछले साल जहां काफी कम उपज हुई थी लेकिन इस बार सामूहिक प्रयासों से 75 क्विंटल से अधिक प्याज, 50 क्विंटल से अधिक लहसुन का उत्पादन हुआ है। इस बार गेहूं की उपज भी अच्छी हुई है। अब ग्रामीणों ने आगे भी इसी तरह आपसी सहयोग से खेती करने का फैसला किया है।
अल्मोड़ा। दाड़िमखोला के इन किसानों का कहना है कि जिन इलाकों में ग्रामीणों के खेत एक ही स्थान पर स्थित हैं और जमीन उपजाऊ है। उन स्थानों पर उपज को सुअर आदि से बचाने के लिए सुरक्षा दीवारों का निर्माण किया जाना चाहिए। इससे रात में सुअर खेतों में नहीं घुस सकेंगे।