न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) भिकियासैंण धर्मेंद्र शाह ने मनरेगा के तहत मजदूरी के 27320 रुपये गबन करने के मामले में मैणाकोट के पूर्व प्रधान रमेश सिंह को धारा 409 में एक साल का कठोर कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना नहीं भरने पर दो माह की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। दोषी ने पूर्व में जेल में जो अवधि बिताई है, उसे भी सजा में समायोजित करने के आदेश कोर्ट ने दिए हैं।
बीडीओ सल्ट बीसी जोशी ने राजस्व उप निरीक्षक बांगीधार के यहां दर्ज कराई प्राथमिकी में कहा था कि रमेश सिंह पुत्र खुशाल सिंह ने ग्राम पंचायत मैणाकोट का प्रधान रहते हुए अपनी पत्नी सावित्री देवी को मनरेगा जॉब कार्ड से 15 अक्तूबर 2009 से 21 अक्तूबर 2009 तक और 22 अक्तूबर 2009 से 25 अक्तूबर 2009 तक दो बार मजदूरी करना दर्शाया। पहली बार एक हजार दो सौ रुपये और दूसरी बार आठ सौ रुपये मजदूरी दिलाई, जबकि इन्हीं तिथियों को पत्नी के जॉबकार्ड पर प्रधान ने स्वयं मजदूरी करना दर्शाकर एक बार छह सौ और दूसरी बार चार सौ रुपये मजदूरी आहरित की।
इसके अलावा, गांव से बाहर रहने वाले लोगों और वर्षों से लापता एक व्यक्ति के जॉब कार्ड से मजदूरी दिखाकर मजदूरी प्राप्त कर ली। इस तरह रमेश सिंह ने कुल 27,320 रुपये का गबन किया, जिसकी पुष्टि लोकपाल मनरेगा ने भी की है।
मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) भिकियासैंण के न्यायालय में चला। अभियोजन की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी राहुल गौतम ने न्यायालय में नौ गवाह पेश कराए। न्यायालय में आरोपी पर धारा 409 में दोष सिद्ध हुआ। आरोपी को एक साल का कठोर कारावास और पांच हजार रुपये अर्थदंड से दंडित किया गया है।