जिला सत्र न्यायाधीश डा. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने पॉक्सो के एक मामले में गवाहों द्वारा पीड़िता के आरोपों का समर्थन नहीं करने पर आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। साथ ही सत्र न्यायाधीश ने अपनी टिप्पणी में कहा कि इन मामलों में कानून के दुरुपयोग की आशंकाओं को देखते हुए न्यायालय को बहुत सतर्क होकर साक्ष्यों की विवेचना करनी चाहिए। न्यायालय ने गलत रिपोर्ट दर्ज कराने पर पीड़िता के पिता और मां को भी न्यायालय में तलब करके स्पष्टीकरण मांगा है।
मालूम हो कि पांच जून 2016 को निकटवर्ती एक गांव के व्यक्ति ने कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करके फेरी लगाने वाले दो युवकों द्वारा उसकी बेटी के साथ छेड़छाड़ और अश्लील हरकतें करने का आरोप लगाया था। पुलिस ने जांच के बाद जुबैर और गुलफाम दोनों निवासी रामपुर को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। तब से आरोपी जेल में ही थे। इस मामले की सुनवाई विशेष सत्र न्यायाधीश डा. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा की अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान गवाहों और खुद पीड़िता के माता-पिता ने अपने बयानों से आरोपों की पुष्टि नहीं की। दोनों पक्षों को सुनने और सबूतों के अध्ययन के बाद विशेष सत्र न्यायाधीश डा. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा ने दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। न्यायाधीश ने पीड़िता के माता-पिता को अदालत में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने को कहा है। अदालत ने उनसे पूछा है कि गलत वाद योजित करने और गलत सूचना देने के आधार पर उनके खिलाफ क्यों न उक्त अधिनियम की धारा 22 के अंतर्गत दंडित करने की कार्रवाई की जाए।
साथ ही विशेष सत्र न्यायाधीश ने दोनों आरोपियों का गांव के पंचायत घर में रखा सामान भी न्यायालय में प्रस्तुत करने को कहा है। फैसले में कहा गया है कि इस मामले में वास्तविक पीड़ित दोनों अभियुक्तगण हैं इसलिए उन्हें नियमानुसार क्षतिपूर्ति और पुनर्वास के लिए विचार किया जाएगा। विशेष सत्र न्यायाधीश डा. ज्ञानेंद्र शर्मा ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि समाज में यह धारणा अभिप्रेरित की जा रही है कि महिलाओं और बच्चियों के लिए बनाए गए कानून का दुरुपयोग हो रहा है। ऐसी सामाजिक धारणा के बीच यह आवश्यक हो जाता है कि न्यायालय को बहुत सतर्क होकर साक्ष्य की विवेचना करनी चाहिए। उन्होंने कहा है कि न्यायालय का उद्देश्य पक्षकारों को न्याय देना है।