बद्रेश्वर नौले की सफाई करते लोग।
- फोटो : अमर उजाला
नगर के माल रोड से सटे जीर्ण-शीर्ण बद्रेश्वर नौले के दिन अब जल्द बहुरेंगे। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) अल्मोड़ा ने इस नौले को गोद लेकर मॉडल के रूप में पेश करने का निर्णय लिया है।
नगर में कई स्थानों पर नौले हैं, लेकिन देखरेख के अभाव में नौले गंदगी से पटे पड़े हैं। गर्मियों में पानी का संकट होने पर नौले ही नगर की आबादी की प्यास बुझाते हैं, लेकिन नौलों में गंदगी होने के कारण धीरे-धीरे पानी दूषित हो रहा है। कई नौलों में जहां गंदगी व्याप्त है वहीं देखरेख के अभाव में कई नौले जीर्ण-शीर्ण हालत में हैं।
नगर के माल रोड से सटे गंदगी से पटे बद्रेश्वर नौले के दिन अब बहुरने की उम्मीद जगी है। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान अल्मोड़ा इस नौले को गोद लेकर मॉडल के रूप में पेश करेगा। स्वच्छ भारत अभियान से प्रेरणा लेकर वीपीकेएएस के निदेशक डॉ. ए पटनायक के नेतृत्व में संस्थान के वैज्ञानिकों और कर्मचारियों ने बद्रेश्वर नौले में सफाई अभियान चलाया। कर्मचारियों ने नौले के आसपास उगी कटीली झाड़ियों, कई जगह पड़ी पॉलिथीन की सफाई की। सफाई अभियान में संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. जेके बिष्ट, प्रशासनिक अधिकारी सीएचएल मीणा, ललित मोहन तिवारी, मदन पांडे, हरीश पांडे, चारु जोशी, कमलेश कुमार, दीवान सिंह, उमेश सिंह, विष्णु पांडे, विजेंद्र कुमार, दलीप सिंह, तारा चंद्र पांडे, गोविंद लाल आदि ने भाग लिया।