भूस्खलन की दृष्टि से अल्मोड़ा नगर काफी संवेदनशील है और बीते बरसों में नगर के कई इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं होती रही हैं। इसका मुख्य कारण नगर में जल निकासी की ठोस व्यवस्था नहीं होना है।
इसके बावजूद इस बार भी अल्मोड़ा नगर की माल रोड, लोअर माल रोड, धारानौला मार्ग समेत अधिकांश सड़कों की नालियां कई स्थानों पर बंद पड़ी हैं। इस कारण आगे भी इस तरह की घटनाएं हो सकती हैं।
बारिश के पानी की निकासी का उचित प्रबंध नहीं होने के कारण बीते कुछ वर्षों में दुगालखोला, खत्याड़ी, विवेकानंद कालोनी, इंदिरा कालोनी सहित कई इलाकों में भूस्खलन की घटनाएं होती रही हैं।
सबसे अधिक नुकसान 2010 में हुआ। तब दर्जनों मकान क्षतिग्रस्त हो गए थे। तब भी विशेषज्ञों ने जल निकासी के उचित प्रबंध नहीं होने को ही भूस्खलन का कारण बताया था।
इसके बावजूद बरसात शुरू होने से पहले नालियों और कलमठों को ठीक से साफ नहीं किया जाता। इस बार भी नगर में कई स्थानों पर नालियां और कलमठ चोक हैं और पानी सड़कों में बहते हुए लोगों के घरों तक पहुंचता है जिससे जल भराव और भूकटाव की समस्या खड़ी होती है।
पटाल बाजार में भी पानी की निकासी की उचित व्यवस्था नहीं है। बारिश होने पर दुकानों और घरों की छतों का पानी बाजार में बहता रहता है। मालरोड का भी बुरा हाल है। डीएम ने बरसात से पूर्व अधिकारियों की बैठक लेकर सड़क किनारे नालियां और कल्वर्ट खोलने के निर्देश दिए थे, लेकिन कई स्थानों पर नालियां और कलमठ नहीं खोले गए हैं।
उधर मकेड़ी में सीवर का चेंबर चोक होने से गंदा पानी धारानौला मार्ग में बह रहा है, लेकिन जल संस्थान इस ओर उदासीन बना हुआ है। तल्ला चीनाखान, चौसार, एमईएस कालोनी, कपीना, गोलना करडिय़ा, दुगालखोला आदि क्षेत्रों में पानी के निकास को नाले नहीं बने हैं। गंदा पानी लोगों के आंगन तक पहुंच रहा है।
पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी कहते हैं कि अल्मोड़ा नगर में पानी की निकासी के उचित प्रबंध किए जाने जरूरी हैं। अन्यथा भूस्खलन का खतरा बना रहेगा। इस संबंध में पूर्व में भी शासन को लिखा गया है।
मंगलवार को अल्मोड़ा आए शहरी विकास मंत्री प्रीतम सिंह को भी अवगत कराया गया। पालिका परिषद के अधीन नाले बंद मिलने की जानकारी मिलने पर तुरंत खोला जाएगा। साथ ही लोनिवि को भी बंद पड़े नालियां और कलमठों को तुरंत खोलने चाहिए।