द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। घटौड़ा पेयजल नलकूप योजना की तालाबंदी खोलने को लेकर प्रशासन तथा जल संस्थान के मंसूबे धरे के धरे रह गए। प्रशासन इस मिनी नलकूप योजना के ताले खोलकर टैंकरों के माध्यम से पानी बांटना चाहता था, इसीलिए ग्रामीणों के साथ बैठक भी बुलाई गई थी, लेकिन बैठक में संघर्ष समिति के लोग आक्रोशित हो गए, कहा कि आठ साल से पेयजल योजना तो नहीं बनाई, अब इससे पानी के टैंकर भरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इस दौरान प्रशासन के अधिकारियों के साथ तीखी झड़प भी हुई।
पेयजल किल्लत को देखते हुए 2006 में 20 लाख रुपये की लागत से पेयजल नलकूप योजना स्वीकृत हुई थी। इससे बिजेपुर, दैरी, घगलोड़ी और धनखलगांव के ग्रामीणों को लाभ मिलना था, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ। 2010, 2012, 2013, 2014 में आंदोलन हुए। 2014 में हुए आंदोलन के दौरान तत्कालीन जिलाधिकारी ने लिखित समझौते में तय किया था कि दो माह के भीतर योजना का निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। तब तक नलकूप में तालाबंदी रहेगी, लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ।
बैठक में ग्रामीणों का कहना था कि योजना तो नहीं बनाई, अब प्रशासन और विभाग नलकूपों के ताले खोलकर वहां से पानी बांटना चाहता है, इसकी अनुमति कतई नहीं दी जाएगी। 2014 के योजना निर्माण की कार्रवाई के संबंध में भी कोई जानकारी नहीं दी गई। संघर्ष समिति ने प्रशासन और विभागीय अधिकारियों पर ग्रामीणों को गुमराह करने का आरोप लगाया। इस दौरान समिति के लोगों की एसडीएम और विभागीय अधिकारियों के साथ तीखी नोकझोंक भी हुई।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि योजना का निर्माण कार्य शुरू होने से पहले तालाबंदी खोली गई तो ग्रामीण आंदोलन करेंगे। बैठक में संयुक्त मजिस्ट्रेट विनीत कुमार, संघर्ष समिति के अध्यक्ष किशन सिंह रौतेला, दान सिंह, लक्षमण सिंह, देव राम, पुष्पा तिवारी, जगत सिंह रौतेला, मनोज भट्ट सहित तमाम लोग मौजूद थे।