सरकार राजनीतिक कारणों से आए दिन डिग्री कालेज खोल रही है, लेकिन इनमें से कई की हालत प्राथमिक स्कूलों से भी बदतर है। दो साल पहले लमगड़ा में स्थापित राजकीय महाविद्यालय में सिर्फ 121 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। यह महाविद्यालय पशुपालन विभाग के एक पुराने भवन में चल रहा है। इस भवन में बिजली तक नहीं है। छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए ब्लॉक कार्यालय से 40-50 कुर्सियों का जुगाड़ किया गया है। जिससे यहां हो रही पढ़ाई की गुणवत्ता का खुद ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
प्रदेश सरकार ने दो साल पहले अल्मोड़ा से करीब 30 किमी दूर लमगड़ा में भी राजकीय महाविद्यालय खोला। यह महाविद्यालय पशुपालन विभाग के एक बंद पड़े छोटे से भवन में चल रहा है। राज्य में शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने के लिए लंबी-चौड़ी बातें की जाती हैं, लेकिन इस डिग्री कालेज में बिजली तक नहीं है। इस हालत में यहां किस स्तर की पढ़ाई हो रही होगी यह खुद ही समझ में आ जाता है। महाविद्यालय में सिर्फ बीए की पढ़ाई होती है और यहां हिंदी, अंग्रेजी, राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र और शिक्षाशास्त्र विषय पढ़ाए जाते हैं। कुल 121 छात्र पढ़ रहे हैं। इनमे बीए प्रथम वर्ष में 76, बीएस द्वितीय वर्ष में 20 और बीए तृतीय वर्ष में 16 छात्र अध्ययनरत हैं।
हालत यह है कि दो साल बाद भी महाविद्यालय में छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए कुर्सियां तक नहीं मिली हैं। जनप्रतिनिधियों के सहयोग से स्थानीय ब्लॉक कार्यालय से 40-50 कुर्सियां मांगी गई हैं। महाविद्यालय में अनेक छात्र अनुपस्थित रहते हैं जिससे इतनी कुर्सियों से काम चल जा रहा है। अगर ब्लॉक कार्यालय इन कुर्सियों को वापस मांग ले तो छात्रों के बैठने के लिए चटाई भी उपलब्ध नहीं है। इस महाविद्यालय में छात्र-छात्राओं के लिए पुस्तकालय भी नहीं है। थोड़ा बहुत पुस्तकें उपलब्ध हैं जिन्हें छात्र-छात्राएं बारी-बारी से ले जाकर पढ़ लेते हैं। महाविद्यालय में पांच विषय पढ़ाए जाते हैं इनमें हिंदी को छोड़कर सभी विषयों के संविदा प्रवक्ता कार्यरत हैं।