अल्मोड़ा। आधुनिक नर्सिंग सेवा की जनक फ्लोरेंस नाइटिंगेल का जन्म दिन यहां महिला अस्पताल में धूमधाम से मनाया गया। इस मौके पर वक्ताओं ने कहा कि फ्लोरेंस आज भी नर्सिंग सेवा कर्मियों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि दया और सेवा की प्रतिमूर्ति फ्लोरेंस द लेडी विद द लैंप के नाम से प्रसिद्ध हैं।
उन्होंने कहा कि फ्लोरेंस का जन्म 12 मई 1820 को एक समृद्ध ब्रिटिश परिवार में हुआ था। संपन्न परिवार में जन्म लेने के बावजूद भी उन्होंने सेवा का मार्ग चुना। परिवार के विरोध के बावजूद वह अपने सेवा के मार्ग पर अडिग रहीं। दिसंबर 1844 में उन्होंने चिकित्सा सुविधाओं को सुधारने और बनाने का कार्य आरंभ किया।
फ्लोरेंस का सबसे महत्वपूर्ण योगदान क्रीमिया के युद्ध में रहा। 1848 में उन्होंने 38 महिलाओं का एक दल घायलों की सेवा के लिए तुर्की भेजा। उनके सेवा कार्यों के लिए उन्हें द लेडी विद लैंप की उपाधि से सम्मानित किया गया। उनमें सेवा का ऐसा जुनून था कि जब चिकित्सक चले जाते थे तब वह रात के अंधेरे में मोमबत्ती जलाकर घायलों की सेवा के लिए उपस्थित हो जातीं।
1849 में उन्होंने सेंट पामस अस्पताल में नाइटेटिल प्रशिक्षण विद्यालय की स्थापना की। इस दौरान उन्होंने नोटस ऑन नर्सिंग पुस्तक लिखी। उन्होंने कहा कि फ्लोरेंस की प्रेरणा से ही नर्सिंग क्षेत्र में महिलाओं की संख्या में इजाफा हुआ। इस मौके पर मैट्रन सरला खलझूनिया, सिस्टर सुरजीत कौर, सीमा श्रीवास्तव, गौरा बोरा, सरिता सनवाल, स्टाफ नर्स शांति, कमला, सीमा, अनीता, नीलम मिश्रा, मंजु तिवारी, विजय, आशा, भावना दीप्ति आदि मौजूद थे।