रानीखेत (अल्मोड़ा)। सब कुछ ठीक रहा तो विश्वविख्यात चौबटिया उद्यान निदेशालय में सेब की स्वदेशी प्रजाति की तरह विलुप्त हो चुकी आडू, बादाम, खुबानी, प्लम, चेरी की विभिन्न प्रजातियों की खुशबू फिर महकेगी। इसके लिए निदेशालय में वृहद मातृ वृक्ष खंड स्थापित करने की तैयारी शुरू हो गई है। इन प्रजातियों के जीर्णशीर्ण पेड़ों से कलम लेकर फिलहाल नर्सरी तैयार की जा रही है। मातृ वृक्ष खंड में इनके पेड़ विकसित किए जाएंगे। इनकी कलम प्रदेश के किसानों को बांटी जाएगी। इन पुराने स्वदेशी फलों के माध्यम से जहां फल उत्पादन बढ़ेगा वहीं किसानों की आय में भी इजाफा होगा।
सेब की तरह ही यहां के आडू, प्लम, बादाम, चेरी, खुबानी, नाशपाती, अखरोट भी काफी प्रसिद्ध थे। फलों का स्वाद ऐसा कि दूसरे राज्यों में भी इनकी मांग रहती थी। इन फलों के पुराने पेड़ तमाम कारणों के चलते अब या तो विलुप्त हो चुके हैं, या फिर विलुप्ति के कगार पर हैं। दरअसल, मुनाफे के चक्कर यहां स्वदेशी के बजाय विदेशी प्रजातियों के फलों पर अधिक जोर दिया गया, लेकिन विदेशी प्रजाति के सेब हों अथवा अन्य फल यहां सफल नहीं हो सके।
उद्यान को उसका पुराना गौरव लौटाने के लिए अब फिर से कवायद शुरू हो गई है। सेब, आडू, प्लम, खुबानी, नाशपाती, चेरी, बादाम और अखरोट के यहां लगाए गए 15 हजार पेड़ों के संरक्षण और संवर्धन का काम शुरू हो गया है। पौध सुरक्षा कार्य, थांवलों का खुदान, झाड़ी कटान, कंपोस्ट खाद, कीट व्याधि रोक, दवा छिड़काव का कार्य भी शीघ्र शुरू होगा। फरवरी में यहां वृहद मातृ वृक्ष खंड विकसित होगा। इसमें इन फलों के पुरानी प्रजाति के पेड़ों की कलम से विकसित पौध लगाए जाएंगे। इनकी कलमें प्रदेशभर के किसानों को बांटी जाएंगी।
हुक्मरानों की अनदेखी ले डूबी उद्यान को
रानीखेत। जो प्रदेश पहले हिमाचल, जम्मू कश्मीर और भूटान को फलों के पौध अथवा कलम देता था, वही प्रदेश अब इन प्रदेशों और देश से फलों की कलमें मंगा रहा है। इन बाहरी प्रदेशों में फल प्रजाति को संरक्षित कर लिया गया, लेकिन यहां अनदेखी की गई। राज्य बनने के बाद उद्यान के क्षेत्र में हुक्मरानों ने ध्यान नहीं दिया। विदेशी सेब की बौनी प्रजाति यहां लगा दी गई और स्वदेशी प्रजाति को महत्व नहीं दिया गया। अब वहीं पुरानी स्वदेशी प्रजाति के फलों से उद्यान की किस्मत बदलने की योजना अमल में लाई जा रही है।
ये पौध होंगे मातृ वृक्ष खंड में संरक्षित
रानीखेत। प्लम प्रजाति के तहत ब्लैक अंबर, रेड ब्यूट, फ्रंटियर, रेड प्लम, नाशपाती प्रजाति में अपाचे फैटल, फैटल, पैखम, बादाम प्रजाति में प्राइमर स्किज, नान पेरिल, हारकौड़, आइएक्सएल, चेरी प्रजाति में न्यूरो, ड्यूरो 3, खुबानी प्रजाति में हारकौड़, आडू प्रजाति में रेड ग्लोब, स्नोक्वीन, फैंटेसी, ग्लोब हैवन, नैक्टीन समेत सेब की विभिन्न प्रजातियों की दो हजार पौध।
उद्यान को उसका पुराना गौरव लौटाने के प्रयास चल रहे हैं। विलुप्त हो चुके इन फलों के पेड़ों को संरक्षित करने की योजना है। इससे किसानों को फायदा मिलेगा। फल उत्पादन भी बढ़ेगा। मातृ वृक्ष खंड में फरवरी से रोपण का कार्य शुरू होगा।
- दामोदर जोशी, ज्येष्ठ उद्यान निरीक्षक, राजकीय उद्यान चौबटिया।