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Almora News: ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिका के नंबर अलग, अभ्यर्थियों ने उठाए सवाल

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रानीखेत (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) की ओर से आयोजित स्नातक स्तरीय (पटवारी/लेखपाल एवं अन्य पद) भर्ती परीक्षा के दौरान रानीखेत स्थित बीरशिवा स्कूल चिलियानौला में बनाए गए परीक्षा केंद्र पर एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। परीक्षा देने पहुंचे चार अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि उन्हें जो ओएमआर शीट दी गई उसका क्रमांक उनकी उत्तर पुस्तिका पर अंकित क्रमांक से अलग था। परीक्षा पहले ही अनियमितताओं और नकल प्रकरण के चलते विवादों में रह चुकी है ऐसे में इस घटना ने अभ्यर्थियों की चिंता और बढ़ा दी है। परीक्षा का दोबारा आयोजन रविवार को किया गया था।
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अभ्यर्थियों के अनुसार जब उन्होंने परीक्षा कक्ष में मौजूद निरीक्षकों और अन्य कार्मिकों को इसकी जानकारी दी तो उन्हें बताया गया कि इस संबंध में आयोग से वार्ता हो चुकी है और किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी। अभ्यर्थियों ने भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी से बचने के लिए लिखित रूप में प्रमाण देने की मांग की लेकिन उन्हें कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया गया।
अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती परीक्षा पहले ही एक बार स्थगित और निरस्त होने के कारण हजारों युवाओं को मानसिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में यदि ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिका के क्रमांक अलग-अलग दर्ज होने जैसी स्थिति उत्पन्न होती है तो इससे उनके भविष्य पर प्रश्नचिह्न लग सकता है।
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उनका कहना है कि यह केवल दो अभ्यर्थियों का मामला नहीं हो सकता। संभव है कि अन्य परीक्षार्थियों के साथ भी ऐसी स्थिति बनी हो लेकिन अधिकांश अभ्यर्थी परीक्षा के दबाव में इस मामले पर बोलने से हिचक गए हों।
अभ्यर्थियों ने मांग की है कि आयोग इस पूरे प्रकरण की जांच कर स्पष्ट करे कि अलग-अलग क्रमांक वाली ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिका से मूल्यांकन प्रक्रिया प्रभावित तो नहीं होगी। वहीं इस मामले में यूकेएसएसएससी के जिला प्रभारी प्रवीण राणा ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि मामला संज्ञान में नहीं है।

क्या बोले परीक्षार्थी

नंबर अलग देख पैरों तले खिसक गई जमीन
पहला अभ्यर्थी
ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिका के क्रमांक अलग-अलग देखकर मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। परीक्षा के बीच अचानक समझ नहीं आया कि क्या करूं। तत्काल ड्यूटी पर तैनात कर्मियों को इसकी जानकारी दी लेकिन लिखित आश्वासन नहीं मिलने से चिंता बनी हुई है।

दूसरा अभ्यर्थी
कई महीनों की तैयारी और कड़ी मेहनत के बाद परीक्षा देने पहुंचे थे। जब दोनों के नंबर अलग दिखे तो एक पल के लिए लगा कि कहीं कोई बड़ी गड़बड़ी तो नहीं हो गई। इससे मानसिक दबाव बढ़ गया और परीक्षा पर भी असर पड़ा।
तीसरा अभ्यर्थी
भर्ती परीक्षाओं को लेकर पहले से ही युवाओं के मन में आशंकाएं हैं। ऐसे में परीक्षा केंद्र पर इस तरह की स्थिति देखकर विश्वास डगमगा गया। यदि सब कुछ ठीक था तो अभ्यर्थियों को लिखित रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए था।

चौथा अभ्यर्थी
संभव है कि यह समस्या केवल हमारे साथ नहीं हुई हो। कई अभ्यर्थी परीक्षा के तनाव में शिकायत नहीं कर पाए होंगे। हमने अपनी बात इसलिए रखी ताकि भविष्य में किसी भी अभ्यर्थी के परिणाम पर इसका असर न पड़े और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी बनी रहे।

कोट -
अभ्यर्थियों की ओर से उठाई गई आपत्ति के संबंध में आयोग से वार्ता कर ली है। क्रमांक में अंतर होने से किसी प्रकार की समस्या नहीं होती है। प्रश्न पुस्तिका पर अंकित जो क्रमांक होता है वही उत्तर पुस्तिका एवं मूल्यांकन प्रक्रिया के लिए मान्य रहता है। अभ्यर्थियों को इस संबंध में किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। - प्रियंका आर्या, केंद्र प्रभारी, बीरशिवा स्कूल चिलियानौला

निजी विद्यालयों में भर्ती परीक्षाएं कराने पर फिर उठे सवाल
- पिछले वर्ष निजी शिक्षण संस्थान से जुड़ा था पेपर लीक प्रकरण
संवाद न्यूज एजेंसी
रानीखेत (अल्मोड़ा)। स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा के दौरान रानीखेत के एक निजी विद्यालय में बने परीक्षा केंद्र पर ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिका के क्रमांक अलग-अलग होने की शिकायत सामने आने के बाद फिर निजी विद्यालयों में भर्ती परीक्षाएं कराने को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब भर्ती परीक्षाएं लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ी होती हैं तो परीक्षा केंद्रों के चयन में अतिरिक्त सावधानी बरती जानी चाहिए।
बता दें कि पिछले वर्ष भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। जांच के दौरान हरिद्वार के एक निजी शिक्षण संस्थान का नाम भी चर्चाओं में आया था। इसके बाद से ही निजी संस्थानों को परीक्षा केंद्र बनाए जाने पर समय-समय पर बहस होती रही है।
रविवार को आयोजित परीक्षा के लिए रानीखेत क्षेत्र में कुल नौ परीक्षा केंद्र बनाए गए थे जिनमें चार केंद्र निजी विद्यालयों में स्थापित किए गए। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकारी विद्यालयों और महाविद्यालयों में प्रशासनिक निगरानी अपेक्षाकृत अधिक प्रभावी रहती है। ऐसे में भर्ती जैसी संवेदनशील परीक्षाओं के लिए सरकारी संस्थानों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अभ्यर्थियों ने सरकार और आयोग से परीक्षा केंद्र निर्धारण की व्यवस्था की समीक्षा करने, भविष्य में सरकारी शिक्षण संस्थानों को प्राथमिकता देने की मांग की है ताकि भर्ती परीक्षाओं को लेकर किसी भी प्रकार की आशंका और विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
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रानीखेत में 9 परीक्षा केंद्र
- निजी विद्यालयों में केंद्र : 4
- सरकारी संस्थानों में केंद्र : 5
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