बरसाती नालों में पानी के बहाव की गति को कम करने के लिए वन विभाग ने बड़े नालों में पत्थर के चेकडैम बनाने की योजना पर अमल शुरू कर दिया है। बरसात के दौरान यह नाले उफान पर रहते हैं। हर साल ग्रामीणों की कई हेक्टेयर भूमि रौखड़ बन जाती है। क्षेत्र में कुजगड़, कालीगाड़ आदि नाले खतरनाक माने जाते हैं। कुजगड़ नाले में छोटे-बड़े 25 चेकडैम, कालीगाड़ गधेरे में पत्थरों के दो बड़े चेकडैम बनाए गए हैं।
कुजगड़ नाले का उद्गम तितालीखेत से होता है। हर साल बरसात में यह नाला पूरे उफान पर रहता है। यह नाला बिनसर, गैरड़, उणीं, बैना सहित टूनाकोट होकर गुजरता है। सब्जी, अनाज उत्पादन के लिए मशहूर इन इलाकों में हर साल भूकटाव होता है। टूनाकोट क्षेत्र में 2010 की आपदा के दौरान दो हेक्टेयर भूमि नाले की भेंट चढ़ चुकी है, जिसे रोकने के लिए वन विभाग ने कैंपा योजना के तहत जल, मृदा संरक्षण का कार्य शुरू किया है। कुजगड़ नाले में तकरीबन 1.30 लाख की लागत से 25 चेकडैम बनाए हैं। इनमें 13, 12 छोटे चेकडैम बने हैं। इनसे पानी के बहाव की गति में विराम लगेगा। कालीगाड़ नाले में दो बड़े चेकडैम बने हैं।
वन विभाग जल, मृदा संरक्षण कार्यक्रम के तहत सौनी के कंपार्टमेंट नंबर 17 में 1.20 लाख रुपए से चारा घास प्रजाति की राई, दोलनी, नैपियर घास का रोपण करेगा। यह कार्य जुलाई से शुरू होगा। इसके लिए छह हजार ट्रंच, 50 हजार प्रसर पिट, जल संग्रहण के लिए 25 से अधिक आयताकार, वृत्ताकार चाल-खाल बनवाए गए हैं।
...तो बस्ती की तरफ रुख नहीं कर सकेंगे जंगली जानवर
सौनी के जंगल में बड़ी संख्या में वन्यजीवों का प्रवास है। जानवरों को जंगल में रोकने के लिए चाल-खाल खोदे गए हैं। इनसे जानवरों को जंगल में ही पानी मिल सकेगा। रेंजर दीवानी राम ने बताया कि सुदूरवर्ती दलमोटी के जंगल में दो चाल-खाल, दो पारंपरिक शैली के नौले, सौनी के जंगल में भी दो नौले बनाए हैं। इनसे ग्रामीणों को गर्मियों में भरपूर मात्रा में पानी मिलेगा। सौनी की नर्सरी में दोलनी, राई, नैपियर घास की पौध तैयार है। जुलाई से रोपण कार्य शुरू हो जाएगा।