कुमाऊं और गढ़वाल की सीमा पर स्थित काली मंदिर में शुक्रवार को लगे चैत्राष्टमी मेले में इस बार भी पशु बलि नहीं हुई। सैकड़ों लोगों ने मंदिर में पूजा, अर्चना कर मन्नतें मांगी। हालांकि बलि के लिए श्रद्धालु दस भैंसों को लेकर पहुंचे थे। मंदिर की परिक्रमा के बाद उन्होंने स्वेच्छा से भैंसों को मंदिर समिति को सौंपा दिया। मंदिर समिति इन भैंसों को पालने के लिए किसानों को देगी। मेले में शांति व्यवस्था के मद्देनजर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।
शुक्रवार को देघाट में लगे चैत्राष्टमी मेले में पशु बलि को रोकने के लिए प्रशासन ने चाक चौबंद व्यवस्था की थी। मन्नतें पूरी होने पर विभिन्न गांवों से दस श्रद्धालु भैंसों को बलि देने के लिए मंदिर में लाए थे। मंदिर की परिक्रमा करने के बाद बलि के लिए लाए गए भैंसों को मंदिर समिति को सौंप दिया गया। मंदिर समिति के अध्यक्ष किशन सिंह मैठानी ने बताया कि भैंसों को पालने के लिए किसानों को सौंपने की प्रक्रिया की जा रही है। मेले में भैंसों की बलि रोकने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। मंदिर में पिछले तीन सालों से पशु बलि नहीं हो रही है। मेले में कुमाऊं समेत गढ़वाल के चौथान, थैलीसैंण, गैरसैंण आदि क्षेत्रों से भी श्रद्धालु पहुंचे हैं।
मंदिर के मुख्य पुजारी बाला दत्त भिरकनी ने मंदिर में पूजा अर्चना आदि धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए। मेले में व्यवस्था बनाए रखने के लिए एसडीएम एनएस नबियाल, सीओ जीएल वर्मा, थानाध्यक्ष अशोक कुमार, एसआई गोविंद सिंह, तहसीलदार वीवी भट्ट, राधे राम आर्या, मंदिर समिति के अध्यक्ष किशन सिंह, वीरेंद्र रावत, गोपाल दत्त ढौंडियाल, अशोक तिवारी, सुरेंद्र गोयल, रघुवर सिंह, मुकेश बंगारी आदि जुटे थे।