अल्मोड़ा। जिले में मेडिकल कॉलेज और सरकारी अस्पताल होने के बावजूद स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। एक भी हृदय रोग विशेषज्ञ (कार्डियोलॉजिस्ट) न होने के कारण दिल के मरीजों को इलाज के लिए महानगरों की दौड़ लगानी पड़ रही है। सरकारी अस्पतालों की ओपीडी में रोजाना आने वाले हृदय रोगियों को फिजिशियन केवल प्राथमिक उपचार देकर हायर सेंटर रेफर कर देते हैं जिससे पहाड़ी क्षेत्र के मरीजों की जान पर बन आ रही है।
पहाड़ के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के दावों के बीच अल्मोड़ा जिले की जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। जिले के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज और अन्य सरकारी अस्पतालों में हृदय रोग विशेषज्ञ नहीं है। अल्मोड़ा जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से हल्द्वानी हायर सेंटर की दूरी 100 से लेकर 300 किमी तक है। दिल का दौरा पड़ने पर मरीज के लिए शुरुआती कुछ घंटे गोल्डन ऑवर यानी सबसे कीमती होते हैं। विशेषज्ञ न होने पर जब मरीज को हल्द्वानी रेफर किया जाता है, तो एंबुलेंस से वहां पहुंचने में ही चार से छह घंटे का समय बर्बाद हो जाता है। पहाड़ी और संकरे रास्तों पर लगने वाले लंबे जाम के कारण एंबुलेंस अक्सर फंसी रह जाती है जिससे गंभीर मरीजों को समय पर ऑक्सीजन और मेडिकल सपोर्ट नहीं मिल पाता। कई मामलों में तो समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं। पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियों के बीच एंबुलेंस का यह लंबा और जोखिम भरा सफर मरीजों की जिंदगी के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है।
जिले के अस्पतालों में हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती नहीं है। यह पद सुपर स्पेशलिस्ट में आता है। फिजिशियन प्राथमिक उपचार करते हैं।
- डॉ. एचसी पंत, सीएमओ, अल्मोड़ा