अल्मोड़ा। गर्मी शुरू होने से साथ ही नगर और ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट गहरान लगा है। भैंसियाछाना ब्लाक के देवड़ा गांव में पिछले एक सप्ताह से पानी की आपूर्ति नहीं होने से राजकीय आदर्श जूनियर हाईस्कूल देवड़ा-चंद्रकोट में मध्याह्न भोजन बनाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण मंगलवार को स्कूल में मध्याह्न भोजन नहीं बन सका और बच्चों को भूखा रहना पड़ा।
भैंसियाछाना विकासखंड के देवड़ा गांव में पिछले कई दिन से पानी की नियमित आपूर्ति नहीं हो रही है। गांव में तीन दिन में एक बार पानी आ रहा है। राजकीय आदर्श जूनियर हाईस्कूल चंद्रकोट देवड़ा में 63 बच्चे अध्ययनरत हैं। स्कूल के लिए अलग से स्वजल की पेयजल योजना बनी है। इस योजना से स्कूल की पानी की आपूर्ति ठप है। होली से पहले भोजनमाता और शिक्षक देवड़ा गांव से पेयजल की व्यवस्था कर मध्याह्न भोजन बना रहे थे लेकिन अब देवड़ा गांव में भी पानी नहीं आ रहा है। बच्चे अपने पीने के लिए भी घरों से ही पानी लाने के लिए मजबूर हैं। पानी की व्यवस्था नहीं होने के कारण मंगलवार को मध्याह्न भोजन नहीं बन सका। इस कारण बच्चों को दोपहर का खाना नहीं मिल पाया। वे बिना भोजन किए घरों को लौट गए। स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि पेयजल किल्लत को लेकर जल संस्थान के अधिकारियों को पूर्व में अवगत करा दिया गया था और टैंकर या पिकअप के जरिये पानी की व्यवस्था करने की मांग की गई थी, लेकिन स्कूल को पानी की आपूर्ति नहीं हो पाई है।
स्कूल को पानी की आपूर्ति करने वाली पेयजल योजना ग्राम पंचायत के अधीन है। ग्राम पंचायत ही योजना की देखरेख करती है। स्कूल को जाने वाला मार्ग काफी संकरा और कच्चा है, जिससे वहां टैंकर या पिकअप भेजा जाना संभव नहीं हो पा रहा है। -केएस खाती, ईई, जल संस्थान अल्मोड़ा।
पानी के लिए ईई कार्यालय में तालाबंदी
बागेश्वर। जिले के नगर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक पेयजल की बदहाल व्यवस्था को लेकर कांग्रेसियों ने रोष जताया। प्रदेश महामंत्री बालकृष्ण के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने जल संस्थान कार्यालय में प्रदर्शन किया। ईई का घेराव कर कार्यालय में तालाबंदी भी की। कांग्रेसियों ने जल्द हर घर को शुद्ध पेयजल नहीं मिलने पर उग्र आंदोलन करने की भी चेतावनी दी।
कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री बालकृष्ण ने कहा कि सरकार की चलाई हर घर नल, हर घर जल योजना पूरी तरह से फेल हो गई है। जिला मुख्यालय में गर्मी आते ही पेयजल समस्या शुरू हो गई है। अधिकतर गांव अब भी पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। जिले के परकोटी, छटिया, रियूनी-लखमार, द्यौनाई, लाहुर घाटी के गांव, कोसानी, धूराफाट, कनगाड़छीना, रीठागाड़ के गांव, चौंरा, लमचूला, लोहागढ़ी सहित कई गांवों में पीने के पानी का संकट है। कई गांवों में पानी नहीं आने के बावजूद लोगों से बिल वसूला जा रहा है।
उन्होंने कहा कि विधायक विकास की बात करते हैं और विभाग पानी की भरपूर आपूर्ति की बात लेकिन धरातल पर हालात बुरे हैं। लोगों को पीने के लिए पानी के लिए प्राकृतिक स्रोत, नदियों और गधेरों पर निर्भर रहता पड़ रहा है। कांग्रेसियों ने तीन दिन के भीतर जिले की पेयजल व्यवस्था सुधारने के लिए कार्य शुरू करने को कहा। चेेताया कि उनकी मांग को गंभीरता से नहीं लिया गया तो क्षेत्रीय जनता को साथ लेकर विभाग के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा। वहां कांग्रेस के जिला उपाध्यक्ष बहादुर सिंह पंत, महेश पंत, अर्जुन देव, गणेश कुमार, रमेश चंद्र, पूरन चंद्र, जीवन लाल आदि थे।
नगर में पानी आने का समय निश्चित नहीं
अल्मोड़ा। नगर क्षेत्र में कई मोहल्लों में पर्याप्त पेयजल की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। मालरोड, नरसिंहबाड़ी, राजपुर, खत्याड़ी, लोअर मालरोड समेत अन्य मोहल्लों में काफी कम समय के लिए पानी आने से लोगों को जरूरत के मुताबिक पानी नहीं मिल पा रहा है। पानी आने का समय निश्चित नहीं होने से नौकरीपेशा और छात्र-छात्राओं को भी दिक्कतों से जूझना पड़ रहा है। (संवाद)
गधेरा बचाओ गगास बचाओ मुहिम शुरू
द्वाराहाट (अल्मोड़ा)। उत्तराखंड प्रगतिशील पार्टी का गधेरा बचाओ गगास बचाओ अभियान शुरू हो गया है। पार्टी के संयोजक शंकर दत्त जोशी ने कहा कि वर्तमान में द्वाराहाट, भिकियासैंण और जालली क्षेत्र के 150 गांव पूर्ण रूप से जल संकट की चपेट में हैं। राज्य सरकार की ओर से बनाई जा रहीं पेयजल योजनाएं अपर्याप्त हैं। कई योजनाएं तो दयनीय हालत में हैं। पुनर्गठन के अभाव में पुरानी योजनाएं दम तोड़ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वन माफियाओं ने क्षेत्र में लगे बांज, बुरांस और चौड़ी पत्ती वाले बड़े-बड़े वृक्षों को अवैध रूप से काट दिया है। स्थानीय प्रशासन मौन धारण किए हुए है। जीवनदायिनी गगास नदी से कई पेयजल योजनाएं संचालित हैं, लेकिन अब यह नदी भी तेजी से सूख रही हैं। गगास नदी के जिन सहायक गधेरों से क्षेत्र के लोगों को पानी मिलता है, वह भी धीरे-धीरे सूखते जा रहे हैं। यदि समय रहते गधेरों का संरक्षण और संवर्धन नहीं हुआ तो गगास नदी पर संकट आएगा। इसका असर द्वाराहाट के साथ-साथ ताड़ीखेत और भिकियासैंण के कई गांवों पर पड़ सकता है। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवी वर्ग और सामाजिक संगठनों का आह्वान किया है कि सभी लोग एक मंच पर बैठकर जल की समस्या को देखते हुए वैचारिक मंथन करें। गगास नदी को पुनर्जीवित करते हुए गधेरा बचाओ गगास बचाओ अभियान को सहयोग करें।