अल्मोड़ा में डायलिसिस मशीन का अनावरण नहीं
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अल्मोड़ा। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद सरकारें पर्वतीय क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे जरूर कर रही हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके विपरीत है। बेस अस्पताल में 50 लाख रुपये की डायलिसिस मशीन पिछले एक दशक से कमरे में बंद है। नेफ्रोलॉजिस्ट और तकनीशियनों के अभाव में स्वास्थ्य विभाग डायलेसिस मशीन को चालू नहीं कर सका है। जिससे गुर्दे की बीमारी से ग्रस्त मरीजों को इस मशीन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। विभाग के उच्चाधिकारियों और जनप्रतिनिधि भी इस ओर उदासीन बने हैं।
अल्मोड़ा में बेस अस्पताल की स्थापना 1987 में हुई। आशा थी कि बेस अस्पताल बनने के बाद पर्वतीय क्षेत्र के लोगों को यहां अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी। इस अस्पताल में अल्मोड़ा के अलावा बागेश्वर और गढ़वाल क्षेत्र के रोगी इलाज कराने पहुंचते हैं। 2006 में 50 लाख रुपये की डायलिसिस मशीन बेस अस्पताल को दी गई। जिसे विभाग अब तक चालू नहीं कर सका है। यह मशीन बंद कमरे में धूल फांक रही है।
अस्पताल की डायलिसिस यूनिट के लिए एक नेफ्रोलॉजिस्ट, तीन तकनीशियन, छह स्टाफ नर्स और चार वार्ड ब्वाय की जरूरत है, लेकिन यह पद सृजित नहीं हुए हैं। मशीन चालू नहीं होने का खामियाजा पर्वतीय क्षेत्र के गुर्दे की बीमारी से पीड़ित मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। जिले के अलावा अन्य इलाकों से मरीजों को यहां लाया जाता है, लेकिन उन्हें हायर सेंटर ले जाना मजबूरी बन गया है।