अलग राज्य बने डेढ़ दशक से अधिक समय हो गया है, लेकिन अब तक जिले के सभी गांवों में पंचायत घरों का निर्माण नहीं हुआ है। जिले में कुल 1162 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से नौ सौ ग्राम पंचायतों में ही सरकार पंचायत घरों का निर्माण कर सकी है। पंचायत घर विहीन ग्राम पंचायतों में बैठकें और सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित करने में ग्रामीणों को दिक्कतें का सामना करना पड़ता है।
राज्य और केंद्र सरकार पंचायतों को सशक्त और सुविधा संपन्न बनाने के समय-समय पर दावे जरूर करती हैं। लेकिन, जिले की सभी ग्राम पंचायतें पंचायत घरों से आच्छादित नहीं हो पाई हैं। अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद आशा थी कि गांवों में पंचायत घर बन जाएंगे, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई खास पहल नहीं हुई है। जनप्रतिनिधि भी इस ओर उदासीन बने रहे।
मानक के मुताबिक प्रत्येक ग्राम पंचायत में पंचायत घर में एक हॉल, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी कार्यालय कक्ष, शौचालय दोमंजिले में गेस्ट रूम बनाया जाता है। ताकि पंचायत घर में ग्राम पंचायत की बैठकें, सार्वजनिक कार्यक्रम आदि संचालित किए जा सकें। जिले में कुल 1162 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें से अब तक मात्र नौ सौ ग्राम पंचायतों के ही पंचायत घर बन सके हैं। 262 गांव पंचायत घर विहीन चल रहे हैं। ब्यूरो
कोट
वंचित गांवों में पंचायत घर बनाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। बजट नहीं मिला है, बजट मिलने के बाद वंचित गांवों में पंचायत घरों का निर्माण हो सकेगा।
- जितेंद्र कुमार, जिला पंचायत राज अधिकारी।