यहीं से होना है रानीखेत बाईपास सड़क का मिलान। संवाद
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। नगर में बाईपास सड़क परियोजना अभी तक अस्तित्व में नहीं आ सकी है। 40 साल पहले आधी अधूरी सड़क बनकर तैयार हो गई थी, लेकिन रक्षा विभाग की एक हेक्टेयर भूमि आड़े आने से परियोजना साकार नहीं हो पा रही है। अब रक्षा मंत्रालय ने इस मामले का संज्ञान लिया है। लोगों को उम्मीद है कि बाईपास बनेगा और रानीखेत में लगने वाले जाम से मुक्ति मिलेगी।
बाईपास सड़क परियोजना में वन भूमि आड़े आने से इसका संचालन शुरू नहीं हो पा रहा है। वन भूमि स्वीकृति का प्रस्ताव सालों से रक्षा मंत्रालय में लंबित है। रानीखेत की यातायात व्यवस्था को दुरुस्त करने के उद्देश्य से 40 साल पहले बाईपास मोटर मार्ग को मंजूरी मिली थी। राय स्टेट के पास से नगर के निचले हिस्से में ग्राम खनिया, इंदिरा बस्ती, राजपुर होते हुए किलकोट गांव तक करीब चार किमी लोअर माल सड़क बनकर तैयार है।
लोअर माल सड़क का जालली-मासी मोटर मार्ग में डिग्री कॉलेज के पास मिलान होना है लेकिन यहां रक्षा भूमि आड़े आ रही है। मिलान स्थल में 0.72 हेक्टेयर रक्षा मंत्रालय की वन भूमि आड़े आने से बाईपास सड़क परियोजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। चार साल पूर्व शासन की ओर से बाईपास सड़क के मिलान के लिए धन स्वीकृत होने के बाद लोक निर्माण विभाग की ओर से छावनी परिषद से वन भूमि के हस्तांतरण की स्वीकृति मांगी गई, जिसके छावनी परिषद ने भूमि के हस्तांतरण का प्रस्ताव रक्षा संपदा अधिकारी को भेजा।
डीईओ बरेली की ओर से प्रस्ताव मंजूर कर स्वीकृति के लिए रक्षा मंत्रालय को भेजा गया। छावनी परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नेेगी ने बताया कि इस संबंध में रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट को ज्ञापन सौंपा गया, उन्होंने सार्थक कार्यवाही का आश्वासन दिया। इसके बाद रक्षा मंत्रालय की तरफ से भी कुछ निर्देश छावनी परिषद को दिए गए हैं। छावनी के सीईओ नागेश कुमार ने बताया कि इस बीच दिशा निर्देश आए थे कि लोनिवि एनओसी के लिए ऑनलाइन आवेदन करेगी। वहां कई पेड़ों के मामला भी आड़े आ रहा है।