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सीमा और कालीगाढ़ तोक के ग्रामीणों ने स्वयं सड़क बनाने का बीड़ा उठाया

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सोमेश्वर/अल्मोड़ा। केवल ढाई किलोमीटर सड़क नहीं बन पाने के कारण सांसद आदर्श गांव सुनोली के सीमा-कालीगाड़ तोक के लोग आज भी पतली और दुरूह पगडंडियों पर मरीजों को डोली में ले जाने के लिए मजबूर हैं।
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शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाकर थक चुके ग्रामीणों ने खुद ही सड़क बनाने की ठानी और गैंती, फावड़ा- बेलचे हाथ में लेकर जुट गए सड़क बनाने में। छह दिन में ही गांव वालों ने दोपहिया वाहन चलने लायक करीब 300 मीटर सड़क बना ली है।
अल्मोड़ा-बागेश्वर मार्ग पर बसौली कसबे से ग्राम पंचायत सुनोली तक सड़क बनी है। सुनोली पूर्व पर्वतीय विकास मंत्री स्व. सोबन सिंह जीना का पैतृक गांव है। लेकिन ढाई किमी दूर स्थित इसके तोक (मझरा) सीमा और कालीगाड़ तक सड़क नहीं है।
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सीमा-कालीगाड़ वाले दशकों से सांसद, विधायक और लोनिवि के अधिकारियों से सड़क बनाने की मांग करते आ रहे हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। इन दोनों तोकों के 50 परिवारों में से आधे पलायन भी कर चुके हैं।
यहां के लोगों को मरीज को अस्पताल ले जाना हो या गैस सिलिंडर लाना हो तो सर्पीले रास्ते पर करीब ढाई किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचना होता है।
हर तरफ से निराशा हाथ लगने पर ग्रामीणों ने आपस में विचार विमर्श कर सीमा-कालीगाड़ तोक को सड़क से जोड़ने का निर्णय लिया। कोरोनाकाल में घर लौटे दर्जनभर युवाओं ने भी उनमें जोश भरा।
गांव के सामाजिक कार्यकर्ता सुशील कुमार कांडपाल के नेतृत्व में 15 से 20 ग्रामीण सुबह सात से 11 बजे और शाम के समय साढ़े तीन से साढ़े पांच बजे तक सड़क निर्माण के लिए श्रमदान कर रहे हैं।
फिलहाल डेढ़ से दो फुट तक चौड़ी सड़क बनाई जा रही है ताकि इसमें दोपहिया वाहन चल सकें। इससे बीमारों और वृद्धों को डोली में सड़क तक पहुंचाने में भी सुविधा होगी।
गांव वाले बोले, वोट के सौदागर झूठे आश्वासन देते हैं
गांव निवासी कला देवी कहती हैं कि चुनाव के समय सभी वोट मांगने आते हैं और झूठे आश्वासन दे जाते हैं। इसके बाद कोई गांव की सुध नहीं लेता है। हर बार ग्रामीण राजनीतिक दलों द्वारा ठगे जाते रहे हैं।
भावना कांडपाल कहती हैं कि सरकार दूरस्थ क्षेत्रों तक सड़क पहुंचाने की घोषणा कर रही है, लेकिन पूर्व पर्वतीय विकास मंत्री रहे सोबन सिंह जीना के ग्राम पंचायत के दो तोकों के लोग यातायात सुविधा से वंचित हैं।
ख्याली दत्त कांडपाल का कहना है कि बार-बार कहने के बाद भी सड़क न बनने से लोग स्वयं को उपेक्षित महसूस करते हैं। मोहन चंद्र कांडपाल का कहना है कि सांसद आदर्श गांव के इन तोकों के लोगों को राज्य बनने के दो दशक बाद भी यातायात सुविधा का इंतजार करना पड़ रहा है। दिनेश चंद्र कांडपाल और पार्वती देवी भी सरकार की उपेक्षा से खिन्न हैं।
सीमा और कालीगाड़ तोक बिनसर सेंचुरी से लगे हैं। इस कारण सड़क का निर्माण नहीं कराया जा सका है। दोनों तोकों को सड़क से जोड़ने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
- अजय टम्टा, सांसद, अल्मोड़ा-पिथौरागढ़।
पिछले एक दशक से दोनों तोकों को सड़क से जोड़ने की मांग की जा रही है पर कहीं से कोई सुनवाई नहीं हो रही है। बीमारों को सड़क तक डोली में लाना पड़ता है। गांव में डोली भी नहीं है।
-सुशील कुमार कांडपाल।
केंद्र सरकार की योजना के तहत 2019 में ग्राम पंचायत सुनोली को सांसद आदर्श गांव बनाया गया है। गांव के विकास के लिए (2019 से 2024 तक) विभिन्न विभागों की सामूहिक रूप से करीब 3.43 करोड़ की कार्ययोजना बनाई गई है।
विभिन्न विभागों के माध्यम से गांव में कुल 104 विकास कार्य प्रस्तावित किए गए हैं। इनमें से 31 कार्य पूरे हो गए हैं, 23 कार्य प्रगति पर हैं, जबकि 50 कार्य शुरू ही नहीं हुए हैं।
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- शैलेंद्र सिंह बिष्ट, परियोजना निदेशक, जिला विकास अभिकरण, अल्मोड़ा।
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