फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Almora News: मक्के की नई किस्म वी एल त्रिपोषी विकसित, संवरेगी किसानों की आर्थिकी

विज्ञापन
विज्ञापन
अल्मोड़ा। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (वीपीकेएएस) ने तीन विशिष्ट गुणों वाली देश की पहली उच्च उपज जैव-सुदृढ़ीकृत मक्के की किस्म ‘वी एल त्रिपोषी’ विकसित की है। यह संकर किस्म जल्द पकने वाली, रोग प्रतिरोधी और पोषण से भरपूर है। इसमें प्रोविटामिन ए, ट्रिप्टोफान और लाइसिन की मात्रा उच्च है जिससे यह सिर्फ उत्पादन ही नहीं बल्कि पोषण सुरक्षा में भी मददगार है।
विज्ञापन




वी एल त्रिपोषी को पूरे उत्तर पर्वतीय क्षेत्र (केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड (पर्वतीय), असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, सिक्किम और त्रिपुरा राज्यों) में खेती हेतु अधिसूचित किया गया है। संवाद

ऐसे की गई विकसित

यह संकर किस्म वीबीएल 301 और वीबीएल 302 के संयोजन से विकसित की गई है। यह चिह्नक सहायक चयन (एमएएस) आधारित कम फाइटेट और उच्च प्रोविटामिन ए वाले क्यू पी एम लाइन वी क्यू एल 1 और वी क्यू एल 2 के संस्करण है। इस अनूठी किस्म में तीन विशिष्ट गुणवत्तायुक्त मक्के के गुण नामत: क्यू पी एम, प्रोविटामिन ए और कम फाइटेट को एक ही संकर में वैज्ञानिक शामिल कर पाए है।
विज्ञापन


एक ही प्रजाति में ये गुण हैं शामिल

क्यू पी एम ...इसका जैविक मान मिल्क प्रोटीन के जैविक मान का लगभग 90 प्रतिशत होता है



प्रोविटामिन ए ...यह विटामिन ए की कमी को दूर कर सकती है।

कम फाइटेट... पोषकतत्वों के शरीर में अवशोषण को बढ़ाता है।



90–95 दिन में तैयार हो जाती है वीएल त्रिपोषी



यह जल्दी पकने वाली (90–95 दिन) संकर किस्म है जिसमें ट्रिप्टोफान 0.086 प्रतिशत, लाइसिन 0.355 प्रतिशत, प्रोविटामिन ए 5.58 माइक्रोग्राम प्रति ग्राम और फाइटेट 2.19 मिलीग्राम प्रति ग्राम है। उत्तरी पर्वतीय क्षेत्र में सभी अखिल भारतीय समन्वित परीक्षणों में इसका औसत उत्पादन 5,232 किग्रा/है जो मूल संकर विवेक क्यू पी एम 9 के समान है। इसने टर्सिकम लीफ ब्लाइट के प्रति मध्यम प्रतिरोधिता प्रदर्शित की।

कोट..



वीपीकेएएस ने मक्के की नई किस्म ‘वी एल त्रिपोषी’ अधिसूचित की है। यह प्रजाति पर्वतीय और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में खाद्य सुरक्षा, पोषण सुरक्षा और किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगी। किसान अब अधिक उत्पादन और बेहतर पोषण वाले मक्के की खेती कर अपनी तकदीर बदल सकेंगे। - डॉ. लक्ष्मी कांत, निदेशक वीपीकेएएस अल्मोड़ा
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें