बागेश्वर। सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली और व्यवस्थाएं कई बार सवाल खड़े करती है। जिले के खेल विभाग में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। जिन खेलों में खिलाड़ियों की संख्या अधिक है, उनके लिए अस्थायी कोच तैनात किए गए हैं। बास्केटबाल खेल के लिए न तो कोर्ट बना है और ना ही खिलाड़ी, लेकिन स्थायी कोच तैनात हैं।
जिले में खेल विभाग की ओर से क्रिकेट, हॉकी, फुटबॉल, ताइक्वांडो, वॉलीबाल, बैडमिंटन, एथलेटिक्स, बॉक्सिंग आदि खेलों का प्रशिक्षण दिया जाता है। इस साल पहली बार जूडो को भी शामिल किया गया है। विभाग के पास जूडो और ताइक्वांडो सिखाने के लिए स्थायी कोच हैं, लेकिन बाकी खेलों के लिए अनुबंध के आधार पर प्रशिक्षक रखे जाते हैं। हालांकि बास्केटबाल ऐसा खेल है, जिसके कोच तो हैं लेकिन खेल कोर्ट नहीं बना है। पंडित बीडी पांडेय परिसर में एक कोर्ट बना है, लेकिन वहां बास्केटबाल का प्रशिक्षण नहीं दिया जाता है। कोच प्रदीप सिंह ने बताया कि खेल कोर्ट ही नहीं होगा तो खिलाड़ी कैसे तैयार होंगे। उच्चाधिकारियों से बास्केटबाल कोर्ट बनाने की मांग की गई है।
खेल महाकुंभ में दम दिखा चुके हैं बास्केटबाल खिलाड़ी
भले ही खेल विभाग में कोच होने के बावजूद बास्केटबाल का प्रशिक्षण नहीं दिया जाता है, लेकिन खिलाड़ियों का हुनर फिर भी दिख रहा है। इस साल के खेल महाकुंभ में जिले की बास्केटबाल टीम ने राज्य स्तर पर भागीदारी की। इनमें से अधिकांश खिलाड़ियों ने पंडित बीडी पांडेय परिसर मैदान में बने कोर्ट से ही अभ्यास किया था।
खोली में बन रहे खेल स्टेडियम में बास्केटबाल का कोच प्रस्तावित है। खेल स्टेडियम का निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की उम्मीद है। फिलहाल खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने के लिए वैकल्पिक माध्यम खोजे जा रहे हैं।
किरन नेगी, प्रभारी जिला क्रीड़ाधिकारी, बागेश्वर