रानीखेत (अल्मोड़ा)। भीषण गर्मी के कारण एक तरफ जहां पेयजल योजनाओं के स्रोत सूखने से कई योजनाएं ठप हैं, वहीं दूसरी तरफ वन विभाग द्वारा तैयार किए गए नौले ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। वन विभाग ने एक साल पहले तहसील के कई इलाकों में जल संवर्धन और संरक्षण कार्यक्रम के तहत प्राचीन स्रोतों को परंपरागत शैली के नौलों का रूप दिया।
वर्तमान में यह नौले लबालब पानी से भरे हैं। 150 लीटर क्षमता वाले इन नौलों को बनाने में कुल छह लाख रुपये खर्च हुए हैं। वन विभाग अब इनके संरक्षण के लिए नौलों के आस पास चौड़ी पत्ती प्रजाति के पौधों का रोपण भी कर रहा है।
रानीखेत तहसील के अंतर्गत कई पारंपरिक जल स्रोत हैं, संरक्षण के अभाव में अधिकांश जल स्रोत लावारिस हालत में थे। एक साल पूर्व वन विभाग ने कैंपा योजना के तहत जल संवर्धन का कार्य शुरू किया। रानीखेत रेंज कार्यालय ने सौनी के कंपाट नंबर 17 में पूरी तरह से जमींदोज हो चुके एक प्राचीन नौले को नए नौले की शक्ल प्रदान की है।
बटुलिया, दलमोटी और देवलीखेत क्षेत्र में भी नए नौले बनाए गए हैं। वर्तमान में भीषण गर्मी के चलते जहां गाड़, गधरों में पानी का जलस्तर सूख रहा है, ऐसे में वन विभाग के यह नौले ग्रामीणों के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। ग्रामीण इन दिनों इन्हीं नौलों का पानी इस्तेमाल कर रहे हैं। नौले का पानी गंदा न हो इस के लिए नौलों से ठीक 20-30 मीटर आगे बड़ी टंकियां बनाई गई हैं।
रानीखेत के वन क्षेत्राधिकारी दीवानी राम कहते हैं कि विभाग ने सौनी, दलमोटी, देवलीखेत और बटुलिया में पुराने नौले का जीर्णोद्धार किया है, जबकि बटुलिया और दलमोटी में नए नौले बनाए हैं। सभी नौले विशुद्ध पर्वतीय शैली में बनाए गए हैं। गर्मियों में इन दिनों यह नौले लबालब पानी से भरे हैं, ग्रामीण इनका लाभ ले रहे हैं। इनके संवर्धन के लिए नौलों के आसपास बांज, उतीस जैसे चौड़ी पत्ती प्रजाति के वन भी विकसित किए जा रहे हैं।