स्याल्दे बिखोती मेले में झोड़ा गायन करती महिलाएं।
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पाली पछाऊं के ऐतिहासिक स्याल्दे विखोती मेले के दूसरे दिन बट पुजै रास्ते का निमंत्रण मेला आयोजित किया गया। नौज्यूला धड़े ने नौ जोड़े नगाड़े-निशानों के साथ ओड़ा भेंटने की रस्म निभाई। बाद में यो रंगिलो चैत मां लटकी रै छै मैतमां जैसे पारंपरिक झोड़े गाए गए।
बटपुजै मेले में नौज्यूला धड़े की ओर से नौ जोड़े नगाड़े-निशानों में शामिल सैकड़ों लोगों ने हुड़के की थाप, रणसिंग की धुनों और नृत्य करते हुए ओड़ा भेंटने की रस्म निभाई। जिसमें मैनोली, तल्ली कहाली, छतीना, बमनपुरी, ध्याड़ी, सलालखोला, हाट, भुमकिया और कौंला के ग्रामवासियों सहित सैकड़ों लोगों ने भागीदारी की। ओड़ा भेंटने के बाद ग्रामीणों ने झोड़ा चांचरी गाए। पूजाखेत बाजार में भी महिलाओं ने झोड़ा गायन किया। मडुवा रवटा, सिसौंड़ा सागा, ओ दिपा तिकैं खांड़ पड़ल सहित तमाम पारंपरिक झोड़ों का देर शाम तक गायन किया गया।
तो इसलिए भेंटा जाता है ओड़ा
द्वाराहाट। बताते हैं कि प्राचीनकाल में यहां शीतला मंदिर और एक पोखर था। जिसमें श्रद्धालु स्नान कर मंदिर में पूजा करते थे। किंवदंती हैं कि एक बार दो धड़ों के सरदारों के बीच झगड़ा हो गया। इनमें से एक सरदार का सिर काटकर जमीन में गाड़ दिया गया, उसी स्थान पर पत्थर रखकर उसे ओड़ा कहा जाता है। वीर रस के त्योहार को मनाने के लिए प्रतिवर्ष ओड़े के ऊपर लाठियों से प्रहार कर इसे विजय के रूप में ग्रामीण मनाते हैं।