पालिका में हुई बैठक में मौजूद अध्यक्ष प्रकाश जोशी, सभासदगण और अन्य।
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अल्मोड़ा। प्राधिकरण गठन से पूर्व की 1256 फाइलें प्रशासन द्वारा अपने कब्जे पर लेने के मुद्दे पर बुधवार को पालिका बोर्ड की आपात बैठक हुई। सदन ने प्रस्ताव पारित कर जिला प्रशासन की इस कार्रवाई की निंदा की है। वक्ताओं ने कहा कि बिना शासन के आदेशों के जिला प्रशासन का यह हस्तक्षेप चुनी गई पालिका बोर्ड को स्वीकार नहीं है।
सदन ने यह भी निर्णय लिया कि यदि किसी भवन स्वामी की पत्रवाली गुम होती है अथवा पत्रावली से छेड़छाड़ होती है तो इसके लिए पूर्णत: जिला प्रशासन उत्तरदायी रहेगा। सदन ने सरकार से मांग की कि इस प्रकार मनमाने हस्तक्षेप पर अंकुश लगाया जाए, ताकि निर्वाचित बोर्ड अपना कार्य बिना किसी बाधा के साथ कर सके। निर्णय लिया गया कि इस प्रकरण को शासन के सम्मुख रखा जाएगा। जरूरत पड़ने पर न्यायालय में भी प्रकरण प्रस्तुत किया जाएगा।
अधिशासी अधिकारी श्याम सुंदर प्रसाद ने सदन को बताया कि प्रशासन के अधिकारियों ने डीडीए गठन से पूर्व पालिका द्वारा स्वीकृत मानचित्रों को डीडीए को 24 दिसंबर की शाम चार बजे तक सौंपने के निर्देश दिए थे। अन्यथा सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में एफआईआर दर्ज करने की बात कही थी। 24 दिसंबर की शाम एसडीम सदर के नेतृत्व में दर्जन भर से अधिक कर्मी पालिका के निर्माण अनुभाग में पहुंचे। उन्हें भवन मानचित्रों के 29 बंडलों की 1256 पत्रावलियां सौंपी गई।
सदन ने मांग की कि जिलाधिकारी की अध्यक्षता में बोर्ड सदस्यों की बैठक आयोजित की जाए। इसके लिए ईओ को तिथि और समय लेने के लिए अधिकृत किया गया। इसके अलावा स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के तहत सदन ने अल्मोड़ा शहर को ओएफडी घोषित किया। बैठक में पालिकाध्यक्ष प्रकाश चंद्र जोशी, सभासद दीपा साह, मनोज जोशी, जगमोहन बिष्ट, अमित साह, दीप्ति सोनकर, हेम चंद्र तिवारी, सचिन आर्य, सौरभ वर्मा, आशा रावत, रेखा अल्मियां के अलावा विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।