रानीखेत (अल्मोड़ा)। बारिश न होने से पहाड़ के किसानों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। शुरुआत में ही सूखा पड़ने से खेती पर संकट गहरा गया है, जिससे किसान मायूस नजर आ रहे हैं। लंबे समय से बारिश न होने के कारण किसान अब तक गेहूं की बुआई नहीं कर सके हैं, वहीं खेतों में गोभी, प्याज और लहसुन की फसलें भी चौपट होने की कगार पर पहुंच चुकी हैं। हाड़तोड़ मेहनत कर किसानों ने खेत तैयार किए थे, लेकिन नमी के अभाव में पैदावार नजर नहीं आ रही।
हालात इतने खराब हो चुके हैं कि किसानों को अपने खाने के लिए भी बाजार पर निर्भर होना पड़ रहा है। मौसम चक्र में बदलाव के साथ-साथ जंगली जानवरों और बंदरों के बढ़ते उत्पात ने खेती को और मुश्किल बना दिया है। लगातार हो रहे नुकसान के कारण किसानों का खेती से भरोसा उठता जा रहा है, जिससे गांवों में उपजाऊ खेत बंजर होते जा रहे हैं।
बोले काश्तकार
बारिश न होने से गेहूं की बुआई तक नहीं हो पा रही है। सब्जी की फसलें सूखने लगी हैं। किसान पूरी तरह प्रकृति पर निर्भर है, लेकिन अब हालात बेहद निराशाजनक हो गए हैं। - मनोज सिंह बिष्ट, काश्तकार
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हर साल मेहनत करते हैं, लेकिन कभी मौसम तो कभी जंगली जानवर मेहनत पर पानी फेर देते हैं। अब तो खेती छोड़ने का मन बनने लगा है। खेतों में फसल नजर नहीं आ रही। - कुबेर सिंह जीना, काश्तकार
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बारिश के बिना पहाड़ की खेती संभव नहीं है। सरकार को नुकसान का सही आकलन कर किसानों को मुआवजा देना चाहिए। लगातार हो रहे नुकसान से गांवों में खेत खाली होते जा रहे हैं। - गजेंद्र सिंह, काश्तकार