सोमेश्वर (अल्मोड़ा)। पढ़ने-लिखने की कोई उम्र नहीं होती है। इस बात को सच कर दिखाया हैं डंगोली निवासी गीता देवी ने। उनमें पढ़ने का ऐसा जुनून जगा कि 28 साल की उम्र में वह पांचवीं की परीक्षा दे रही हैं। जबकि उनका बेटा कक्षा तीन और बेटी एलकेजी में पढ़ती है। गीता देवी उच्च शिक्षा प्राप्त करके अशिक्षितों के लिए काम करना चाहती हैं।
मूलरूप से नेपाल की रहने वाली गीता देवी का परिवार डंगोली में रहता है। गीता ने 1993 में प्राथमिक स्कूल सोमेश्वर से चौथी कक्षा की परीक्षा उत्तीर्ण की। गरीबी के कारण उसकी पढ़ाई छूट गई। वर्ष 2006 में गीता की शादी हो गई, लेकिन उसके मन से पढ़ाई की लालसा नहीं गई। शादी के बाद गीता के दो बच्चे हुए। गीता के बच्चे बड़े हुए तो वह स्कूल जाने लगे। बच्चों को स्कूल जाते देखकर उसे भी अपनी पढ़ाई पूरी करने की इच्छा जागी।
गीता ने अपनी इच्छा ससुरालियों को बताई तो उन्होंने भी पढ़ाई के लिए हामी भर दी। इसके बाद गीता ने प्राथमिक स्कूल सोमेश्वर की प्रधानाध्यापिका सुधा उपाध्याय से संपर्क किया और पांचवीं कक्षा का व्यक्तिगत परीक्षा फार्म भरा। इन दिनों गीता प्राथमिक स्कूल सोमेश्वर में पांचवीं की परीक्षा दे रही हैं।
गीता के पति डंगोली में मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करते हैं। जबकि उसका नौ वर्षीय बेटा सनसाइज पब्लिक स्कूल घाघली में तीसरी कक्षा और तीन वर्षीय बेटी एलकेजी में पढ़ती है। गीता उच्च शिक्षा प्राप्त कर शिक्षा से वंचित रह गए लोगों के लिए काम करना चाहती है।