रानीखेत (अल्मोड़ा)। पहाड़ों में पहले से ही तेंदुए की दहशत से जूझ रहे लोगों के लिए अब बंदरों की बढ़ती संख्या चिंता का विषय बन गया है। रानीखेत नगर सहित आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बंदर अब पहले की तरह डरकर भागते नहीं बल्कि सीधे लोगों पर झपटने लगे हैं।
पिछले एक माह में बंदरों के हमलों में 25 से अधिक लोग घायल हो चुके हैं जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाना पड़ा है। लोगों का आरोप है कि मैदानी क्षेत्रों से बंदरों को पकड़कर पहाड़ी इलाकों में छोड़ा जा रहा है जिससे समस्या और गंभीर हो रही है। लोगों ने वन विभाग से मामले की जांच कर ऐसे कार्यों पर रोक लगाने की मांग की है।
क्या बोले लोग, स्थानीय
- बंदरों का व्यवहार अब बेहद आक्रामक हो गया है। पहले बंदर लोगों को देखकर दूर भाग जाते थे, लेकिन अब झुंड में आकर सीधे हमला कर रहे हैं। बच्चों और बुजुर्गों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। - दीपक पंत, स्थानीय निवासी
- बंदरों के आतंक से ग्रामीण क्षेत्रों में खेती करना मुश्किल हो गया है। बंदर खेतों में खड़ी फसल और फलदार पौधों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। कई लोग खेती छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। - मनोज ऐरड़ा, स्थानीय निवासी
- बंदरों के झुंड अब राह चलते लोगों को भी निशाना बना रहे हैं। प्रशासन और वन विभाग को केवल पकड़ने की औपचारिकता से आगे बढ़कर स्थायी समाधान निकालना होगा। - गोविंद बिष्ट, स्थानीय निवासी
- बंदरों के डर से अभिभावक बच्चों को अकेले स्कूल या बाजार भेजने से भी घबरा रहे हैं। कई बार बंदर घरों में घुसकर सामान तक उठा ले जाते हैं। - विक्रम सिंह, स्थानीय निवासी
कोट -
बंदरों को पकड़ने के लिए विभाग समय-समय पर अभियान चलाता है। बंदरों के उत्पात को नियंत्रित करने के लिए जल्द ही प्रभावी रणनीति के तहत कार्रवाई की जाएगी। लोगों से अपील है कि बंदरों को खाने की चीजें न दें, जिससे उनका व्यवहार और अधिक आक्रामक न हो। - तापस मिश्रा, वन क्षेत्राधिकारी रानीखेत