कटखने बंदरों ने क्षेत्र में खासा आतंक मचाया हुआ है, इसके बावजूद इनकी रोकथाम के लिए सरकार की तरफ से ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। बंदरों ने जहां पहाड़ की खेती किसानी चौपट कर दी है, वहीं अब लोगों पर भी हमला करना शुरू कर दिया है। रानीखेत के कुुंपुर लालकुर्ती में बंदरों ने छत पर कपड़े सुखा रही महिला पर हमला बोलकर उसे जख्मी कर दिया। तीन महीने में बंदर अब तक आधा दर्जन से अधिक महिलाओं को जख्मी कर चुके हैं, जिसके चलते लोगों में खासा आक्रोश है।
बंदरों ने पहाड़ की अर्थ व्यवस्था की रीढ़ समझी जानी वाली खेती-किसानी को तो तबाह कर ही दिया है, लोगों ने खेतों में सब्जियां बोना बंद कर दिया है। रानीखेत क्षेत्र में भी बंदरों ने खासा आतंक मचाया हुआ है। कुंपुर लालकुर्ती में बंदरों ने छत पर कपड़े सुखा रही माया गोयल पर हमला बोल दिया।
बंदरों के झुंड ने माया अग्रवाल के सिर और कमर को बुरी तरह से जख्मी कर दिया है। उन्होंने नगर के एक निजी क्लीनिक में उपचार कराया। पिछले तीन माह के भीतर बंदर लालकुर्ती में ही जमुना देवी सहित छह से अधिक महिलाओं को जख्मी कर चुके हैं। सामाजिक कार्यकर्ता रामेश्वर गोयल ने बताया कि बंदरों को भगाने के लिए लोग दिन भर छतों में लाठी लेकर घूम रहे हैं।
क्षेत्र में कई दुकानदारों ने बंदरों से बचने के लिए दुकानों के आगे लोहे के जाल तक लगाए हैं, पूर्व में रानीखेत में बंदरों को पकड़ने के लिए छावनी परिषद की तरफ से भी मुहिम चलाई गई, लेकिन इस मुहिम को भी खास सफलता नहीं मिली।
बंदरों द्वारा जख्मी किए जाने वाले केस हर महीने राजकीय अस्पताल में 10 से अधिक आते हैं। कभी कभार इनकी संख्या और भी अधिक बढ़ जाती है। - डा. डीएस नेई, अधीक्षक राजकीय अस्पताल रानीखेत।