खत्याड़ी मनोज विहार कालोनी में घर पर मधुमक्खियों के बाक्स के साथ कमला भंडारी।
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अल्मोड़ा। खत्याड़ी की मनोज विहार कॉलोनी निवासी कमला भंडारी मौनपालन कर महिला सशक्तीकरण की मिशाल पेश कर रही हैं। उन्होंने मौनपालन को स्वरोजगार के रूप में अपनाया है। पिछले सात साल की मेहनत के बाद मौनपालन कर प्रतिवर्ष ढाई क्विंटल शहद का उत्पादन कर रही हैं। घर से ही शहद बेचकर वह सालभर में डेढ़ लाख रुपये से अधिक आय अर्जित कर रही हैं।
कमला लोक चेतना विकास समिति के माध्यम से गठित महिला स्वयं सहायता समूह से समूह से जुड़ी हैं। उन्होंने खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड के माध्यम से छह दिन का मौनपालन प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण के बाद उनमें मौनपालन की रुचि जागी। कमला ने वर्ष 2013 में व्यक्तिगत रूप से दो बॉक्स खरीदकर मौनपालन शुरू किया। अब उनके पास मधुमक्खियों की 102 बॉक्स हैं। सालभर में वह दो से ढाई क्विंटल का शहद का उत्पादन कर लेती हैं। इसमें उनके दो पुत्र भी उन्हें सहयोग करते हैं। कमला के पति गोविंद सिंह कनारीछीना में डिप्टी रेंजर हैं। कमला इच्छुक लोगों को मौनपालन के गुर भी सिखाती हैं। उनके पास दो सौ से अधिक बॉक्स हो गए थे। इनमें से 100 बॉक्स उन्होंने मौनपालन के इच्छुक लोगों को बेच भी दिए। वह बताती हैं कि शुरुआत में शहद उत्पादन करने के बाद विपणन में काफी समस्याएं आई। बिना किसी सरकारी मदद के उन्होंने आसपास के लोगों से संपर्क कर अपनी पहुंच बढ़ाई। अब लोग उनके यहां स्वयं ही शहद खरीदने आते हैं।