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शिक्षकों के लिए नजीर बने चौहान 

Tue, 02 Aug 2016 01:25 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, रानीखेत (अल्मोड़ा)।
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सरकारी स्कूल के मॉडर्न बच्चे - फोटो : अमर उजाला
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। खुद के बच्चों को अच्छे निजी स्कूलों में पढ़ा रहे सरकारी शिक्षकों को सुदूरवर्ती सल्ट के रीठा-टुकरा प्राइमरी स्कूल के सहायक अध्यापक नागेंद्र सिंह चौहान आइना दिखा रहे हैं। चौहान ने न सिर्फ अपने पुत्र को सरकारी स्कूल में दाखिला दिलाया है, वरन स्कूल के बच्चों को अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकें और खेल सामग्री भी उपलब्ध कराई है। वह समय निकालकर स्कूल में ही इन बच्चों को अंग्रेजी विषय का ज्ञान भी दे रहे हैं। 
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चौहान कहते हैं कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए सरकार लंबे समय से अच्छे प्रयास कर रही है। तमाम सुविधाएं दी हुई हैं, शिक्षकों का भी दायित्व है कि वह देश के कर्णधारों का भविष्य संवारने के लिए हरसंभव प्रयास करें। सरकारी स्कूलों में शिक्षकों को अपने स्वयं के बच्चों को भी दाखिला दिलाना चाहिए, इससे शिक्षा की गुणवत्ता में और सुधार आएगा। बच्चों का भविष्य संवरेगा तो ही समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की परिकल्पना साकार होगी।

चौहान ने अपने पुत्र प्रणव चौहान को रीठा टुकरा में ही दाखिला दिलवाया है, जबकि उनका दूसरा पुत्र अभी छोटा है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष तक उनके स्कूल में सात बच्चे पढ़ते थे, इस बार बच्चों की संख्या 12 हो चुकी है। स्कूल में केवल वे ही एकमात्र शिक्षक हैं। बच्चों को वह खेलकूद, पीटी आदि भी कराते हैं। वह कहते हैं कि बच्चों का शैक्षिक के साथ साथ शारीरिक विकास भी होना जरूरी है।
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बच्चों के लिए उन्होंने अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकें, डिस्पले बोर्ड, ग्रीन बोर्ड, क्रिकेट किट, खो-खो बाल, कैरम, लूडो, बैडमिंटन, रस्सीकूद आदि सामग्रियां भी अपने निजी खर्चे से उपलब्ध कराई हैं। चौहान ने अपने इन प्रयासों से उन शिक्षकों की मानसिकता पर भी तीखे प्रहार किए हैं, जो शिक्षक सोचते हैं कि उनके स्वयं के बच्चों का भविष्य अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों में ही सुरक्षित है। 
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