विशेष सत्र न्यायाधीश डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा की अदालत ने नाबालिग के साथ दुराचार और हत्या के प्रयास के मामले में आरोपी पति सूरज पाल पुत्र ब्रह्मपाल निवासी खोड़ा कालोनी प्रताप बिहार गाजियाबाद (उप्र) को 4/5 पॉक्सो एक्ट, 366 (क), 307/34, 370, 376(2) और वाहन चालक सोहन सिंह बिष्ट को 4/5 पॉक्सो एक्ट, धारा 307/34, 376 (2) में दोषी पाया है। न्यायालय ने आरोपियों को सजा सुनाने के लिए नौ मई की तिथि तय की है, जबकि पीड़िता के पिता के विरुद्ध अपराध साबित नहीं होने पर उसे दोषमुक्त किया गया।
14 अक्तूबर 2018 को संदीप नेगी अपनी कार से रात्रि 8:30 बजे मरचूला से धूमाकोट को जा रहे थे। मरचूला में उन्हें बचाओ-बचाओ की आवाज सुनाई दी। उन्होंने देखा कि करीब बीस फुट गहरी खाई में एक लड़की पड़ी थी और चिल्ला रही थी। वह बहुत घबराई हुई थी। उसे खाई से बाहर निकाला। पूछने पर उसने बताया कि उसका पति सूरज पाल और वाहन चालक सोबन सिंह बिष्ट उसे यहां फेंक गए। सूचना मिलने पर महिला पुलिस मौके पर पहुंची और पीड़िता को अस्पताल पहुंचाया। 17 अक्तूबर को पीड़िता का अल्मोड़ा अस्पताल में मेडिकल कराया गया।
दरअसल, 27 अगस्त 2018 को 13 वर्षीय नाबालिग की घर वालों की मर्जी से सूरज पाल निवासी खोड़ा कालोनी प्रताप बिहार गाजियाबाद (उप्र) के साथ सपोली मंदिर में शादी हुई थी। पीड़िता ने बताया कि शादी के बाद दोनों खोड़ा कालोनी में किराये के मकान में रहते थे। कुछ दिन बाद सूरज पाल उसे वैष्णो देवी मंदिर घुमाने के बहाने गाड़ी बुक कराकर सल्ट जिला अल्मोड़ा ले आया। पति और चालक ने गाड़ी रोककर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और जान से मारने की नीयत से करीब बीस फुट गहरी खाई में धक्का दे दिया। पीड़िता के बयानों के आधार पर दोनों आरोपियों और पीड़िता के पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। विवेचनाधिकारी ने आरोप पत्र न्यायालय में पेश किया। मामले का विचारण विशेष सत्र न्यायाधीश अल्मोड़ा के न्यायालय में हुआ। अभियोजन की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) गिरीश चंद्र फुलारा, सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता शेखर चंद्र नैल्वाल, विशेष लोक अभियोजक भूपेंद्र कुमार जोशी ने नौ गवाह न्यायालय में पेश कराए और प्रभावी पैरवी की। जिसमें निर्भया प्रकोष्ठ की अधिवक्ता अभिलाषा तिवारी ने भी सहयोग दिया। न्यायालय में आरोपी पति सूरज पाल और चालक सोबन सिंह बिष्ट पर दोष सिद्ध हुआ, जबकि पीड़िता के पिता के विरुद्ध अपराध साबित नहीं होने पर उसे दोषमुक्त किया गया।