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Almora News: नौ साल से विकास की राह देख राह रानीखेत का मिनी कॉर्बेट

Mon, 30 Jun 2025 11:50 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
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दलमोठी का जंगल, जो अब भी विकास की राह तक रहा है। संवाद - फोटो : samvad
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दलमोठी वन क्षेत्र में 2015 में बनी थी मिनी अभयारण्य की योजना
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। एक समय पर्यटकों की पहली पसंद रहे रानीखेत में अब साल दर साल पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट देखी जा रही है। इसका सबसे बड़ा कारण यहां पर्यटक स्थलों की कमी मानी जा रही है। खासतौर पर ऐतिहासिक गोल्फ मैदान से सटे करीब 1200 हेक्टेयर में फैले दलमोठी वन क्षेत्र (मिनी कॉर्बेट) का अब तक विकास न होना स्थानीय पर्यटन को बड़ा झटका दे रहा है।
वर्ष 2015 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के समय वन विभाग ने दलमोठी क्षेत्र को मिनी अभयारण्य के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। 2016 में यह योजना कैबिनेट से मंजूर भी हो गई। इसके तहत सफारी, बर्ड वाचिंग सेंटर, जैव विविधता संरक्षण समेत कई पर्यटक गतिविधियों को शुरू करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन 2017 में सत्ता परिवर्तन के बाद यह महत्वाकांक्षी योजना ठंडे बस्ते में चली गई।
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1200 हेक्टेयर में फैला, पर्यटन के लिए उपयुक्त
रानीखेत। दलमोठी वन रेंज अपने आप में जैव विविधता का खजाना है। यह क्षेत्र पक्षी प्रेमियों, वन्यजीव पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए अत्यंत आकर्षक स्थल बन सकता है। बावजूद इसके पिछले आठ वर्षों में सरकार की ओर से इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। संवाद
बोले लोग-
अक्तूबर 2014 में उस समय रानीखेत के एसडीएम रहे एपी वाजपेयी ने ''फ्लोरा एंड फॉना'' फॉर्मूले के तहत इस क्षेत्र को कॉर्बेट की तर्ज पर विकसित करने के लिए मास्टर प्लान तैयार किया था। शासन से प्रस्ताव पारित होने के बावजूद आज तक विकास कार्य नहीं हो सका।
दीप उपाध्याय, स्थानीय निवासी।
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जैव विविधता से भरपूर दलमोठी वन क्षेत्र को कॉर्बेट नेशनल पार्क की तरह विकसित किया जाना चाहिए। इससे रानीखेत में पर्यटन को नई दिशा मिल सकती है।
आनंद अग्रवाल, व्यवसायी

मिनी अभयारण्य के लिए 25 लाख की टोकन मनी भी मिली थी, लेकिन 2017 में सरकार बदलने के बाद वह राशि लौट गई और आगे कोई कार्यवाही नहीं हो सकी। सरकार को इसे पर्यटन की दृष्टि से प्राथमिकता देनी चाहिए।
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जगदीश अग्रवाल, होटल व्यवसायी
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पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए इस वन क्षेत्र का विकास जरूरी है। इससे एक ओर पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, वहीं दूसरी ओर स्थानीय युवाओं को गाइड व अन्य रूप में रोजगार के अवसर मिलेंगे।
पारस उपाध्याय, रानीखेत
कोट-
वर्तमान में दलमोठी वन क्षेत्र को जंगल सफारी व अन्य कार्यों हेतु विकसित करने की कोई योजना नहीं है। प्रस्ताव आने पर उच्चाधिकारियो को भेजा जायेगा।
दीपक सिंह, डीएफओ, अल्मोड़ा।
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