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Almora News: साइलेंट किलर बन रहा मानसिक रोग, बेस अस्पताल में रोज आ रहे 50 से अधिक मामले

Sat, 10 Oct 2026 12:43 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अल्मोड़ा
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अल्मोड़ा। जिले में मानसिक बीमारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है। अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध बेस अस्पताल की ओपीडी में रोजाना मानसिक रूप से पीड़ित 50 से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं जिनमें हर दिन औसतन 15 युवा शामिल हैं। चिंताजनक बात यह है कि महिलाएं ही नहीं बल्कि पांच से 14 वर्ष के मासूम बच्चे भी तेजी से एडीएचडी और ऑटिज्म जैसी मानसिक व व्यावहारिक चुनौतियों की गिरफ्त में आ रहे हैं।
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मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती बेरुखी के बीच जिले से बेहद चिंताजनक तस्वीरें सामने आ रही हैं। हर वर्ष 10 अक्तूबर को दुनिया भर में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाने और सामाजिक भ्रांतियों को दूर करने के लिए विशेष दिवस मनाया जाता है लेकिन धरातल पर स्थिति यह है कि जिले में मानसिक रोगियों का ग्राफ लगातार ऊपर चढ़ रहा है। सोबन सिंह जीना राजकीय मेडिकल कॉलेज से संबद्ध बेस अस्पताल की मनोरोग ओपीडी के आंकड़े बताते हैं कि यहां मानसिक बीमारी के 50 से अधिक नए और पुराने मरीज रोजाना परामर्श के लिए पहुंच रहे हैं। चिकित्सकों के अनुसार अवसाद की इस दौड़ में सबसे संवेदनशील स्थिति युवाओं की है। बेस अस्पताल आने वाले कुल मरीजों में रोजाना करीब 15 मरीज युवा वर्ग के होते हैं जिसमें नशा, आधुनिक जीवनशैली में कॅरिअर का दबाव, बेरोजगारी की चिंता, रिश्तों में उतार-चढ़ाव और सोशल मीडिया की आभासी दुनिया युवाओं को तेजी से मानसिक रूप से बीमार बना रही है। इसके साथ ही गृहणियां और कामकाजी महिलाएं भी बड़े पैमाने पर इस बीमारी का शिकार हो रही हैं। विशेष रूप से नवजात को जन्म देने के बाद महिलाओं में होने वाले हार्मोनल और सामाजिक बदलावों के कारण पोस्टपार्टम डिप्रेशन के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं जिसे अक्सर परिवार सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज कर देता है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

• लगातार उदास रहना या अकेले रहने की इच्छा होना।

• स्वभाव में अचानक अत्यधिक चिड़चिड़ापन या गुस्सा आना।

• भूख और नींद के पैटर्न में अचानक बड़ा बदलाव आना।

• किसी भी काम में मन न लगना और नकारात्मक विचार आना

बदलती जीवनशैली, सोशल मीडिया की लत और कॅरिअर के बढ़ते दबाव के कारण युवाओं और बच्चों में अवसाद के मामले तेजी से बढ़े हैं। महिलाओं में प्रसव के बाद होने वाले पोस्टपार्टम डिप्रेशन को अक्सर लोग पहचान नहीं पाते। मानसिक तनाव या व्यवहार में बदलाव दिखने पर उसे छुपाने के बजाय तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श और काउंसलिंग कराना बेहद जरूरी है। -डॉ. वीना तेजन, मनोरोग विशेषज्ञ बेस अस्पताल अल्मोड़ा
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