जब सोमनाथ शर्मा को दक्षिणी बडगाम का मोर्चा मिला
तीन नवंबर की रात सोमनाथ शर्मा को दक्षिणी बडगाम का मोर्चा मिला। 700 दुश्मनों ने उनकी कंपनी पर मोर्टारों और छोटी मशीनगनों से हमला बोल दिया। उनकी कंपनी के जवान शहीद होने लगे लेकिन श्रीनगर ऐरोड्रम और बडगाम की सुरक्षा के लिए मेजर ने दुश्मन को उलझाए रखा।
मेजर सोमनाथ खुले मैदान में भारी गोलाबारी के बीच इधर उधर दौड़कर जवानों का हौसला बढ़ाते रहे और जवाबी हमले करते रहे। हाथ में प्लास्टर लगा होने के बावजूद वह मैगजीनों में गोलियां भरकर जवानों को देते रहे। इसी बीच एक मोर्टार का गोला उनके पास रखे विस्फोटकों में गिरा और विस्फोट के साथ वीरगति को प्राप्त हो गए। मेजर सोमनाथ तथा उनके साथियों की बहादुरी तथा बलिदान के बलबूते बडगाम हवाई अड्डा बच गया।
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रानीखेत में उनके नाम पर है सोमनाथ मैदान
परमवीर चक्र प्राप्त विजेता सोमनाथ शर्मा के नाम से रानीखेत में कुमाऊं रेजीमेंट केंद्र ने सैन्य मैदान का नाम सोमनाथ रखा गया है। यहां म्यूजियम में उनके युद्ध के समय की कई सामग्रियां तथा उनकी यादों से जुड़ी कई चीजें उपलब्ध हैं। तीन नवंबर 1947 को वे शहीद हो गए थे। आज उनकी 75वीं पुण्यतिथि है।