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घोषित जिलों के लिए संयुक्त संघर्ष समिति ने आंदोलन को दी धार

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रानीखेत में संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों के साथ नारेबाजी करते रानीखेत के लोग। अमर उजाला - फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। नौ साल पूर्व सरकार द्वारा घोषित रानीखेत, डीडीहाट, कोटद्वार और यमुनोत्री जिलों को अस्तित्व में लाने की मांग को लेकर संयुक्त संघर्ष समिति ने संघर्ष तेज कर दिया है। यमुनोत्री से यहां पहुंचे जनजागरण अभियान का रानीखेत में भव्य स्वागत किया गया। इससे पूर्व ताड़ीखेत सहित आसपास के इलाकों में भी जिलों को लेकर जनजागरण अभियान चलाया गया। सुभाष चौक पर ढोल-दमाऊ के साथ जोरदार नारेबाजी हुई।
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गोष्ठी में 18 नवंबर को अधिक से अधिक संख्या में लोगों से देहरादून पहुंचने का आह्वान किया गया।
संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष अव्वल चंद्र कुमाई के नेतृत्व में जनजागरण यात्रा 12 नवंबर को यमुनोत्री से शुरू हुई थी।
इसके बाद कोटद्वार और फिर शुक्रवार को यात्रा यहां रानीखेत पहुंची। यहां स्वागत समारोह के बाद समिति के पदाधिकारियों ने भावी योजनाएं बताईं। कहा कि 2011 में घोषित जिलों को लेकर सरकारों ने उनके साथ छलावा किया है। लेकिन इस बार वह अपने अभियान से पीछे नहीं हटेंगे। समिति के संरक्षक डीएन बड़ोला ने कहा कि सरकार में इच्छाशक्ति का अभाव है।
अध्यक्ष कुमाई ने कहा कि वह लोग यमुना मां और उत्तरकाशी के वासुदेवता के मंदिर में संकल्प लेकर आए हैं। रानीखेत के बाद यात्रा डीडीहाट को रवाना हुई। तय हुआ कि 18 दिसंबर को देहरादून में चारों जिलों के संघर्ष समितियों के पदाधिकारी एकत्रित होकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगे।
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इस दौरान समिति के पूरन सिंह, विशालमणि रतूड़ी, भरत सिंह चौहान, गुलाब सिंह, नरोत्तम रतूड़ी, बलवीर सिंह, फकीरा लाल, महिपाल सिंह, रमेश बिष्ट, रानीखेत संघर्ष समिति के गिरीश भगत, मोहन नेगी, विमल सती, मनोज अग्रवाल, कुबेर सिंह, हर्ष पंत, कामरान कुरैशी, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष गंगा सिंह रावत, रघुनंदन वैला, सीपी पांडे सहित तमाम लोग मौजूद रहे। संघर्ष समिति ने कहा यदि मांग पूरी नहीं होती है तो केंद्रीय मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल को घेराव किया जाएगा
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