सरकार ने विवाह पंजीकरण जरूरी करने को कानून बनाया है पर इसके बावजूद लोगों में मैरिज रजिस्ट्रेशन कराने के प्रति जागरूकता नहीं है।
आवश्यक कार्य के लिए ही लोग मैरिज रजिस्ट्रेशन कराते हैं, जबकि अनिवार्य पंजीकरण के लिए सर्वोच्च न्यायालय ने भी फैसला दिया है पर सरकारें इसे सख्ती से लागू नहीं करा पा रही हैं। 41 सालों में कुल 2013 विवाह पंजीकरण हुए हैं। इनमें सबसे अधिक 2015 में 390, जबकि इस वर्ष अब तक 93 रजिस्ट्रेशन हुए हैं। 1977-80 तक किसी ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया।
हिंदू मैरिज एक्ट 1955 में मैरिज रजिस्ट्रेशन का प्राविधान है। शादी का रजिस्ट्रेशन रजिस्ट्रार कार्यालयों में किया जाता है। जिले में प्रतिवर्ष हजारों की संख्या में विवाह होते हैं, पर विवाहित जोड़े शादी का पंजीकरण नहीं कराते हैं। सरकारों की हीलाहवाली और लोगों में जागरूकता की कमी के चलते अधिकांश जोड़े विवाह पंजीकरण कराना जरूरी नहीं समझते। सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में सीमा बनाम अश्विनि कुमार वाद में मैरिज रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य करने का फैसला दिया था, लेकिन इस फैसले के अनुपालन में भी सरकारें अधिक रुचि नहीं ले रही हैं। लोगों का कहना है कि सरकार को जन्म और मृत्यु पंजीकरण की तरह ही मैरिज रजिस्ट्रेशन भी अनिवार्य करना चाहिए।
कानून दस्तावेज के रूप में मान्य विवाह पंजीकरण
पासपोर्ट बनाने, विवाह पश्चात उपजाति परिवर्तन, कानूनी मामलों, सैन्य अभिलेखों, बैंक, डाकघर, संपत्ति उत्तराधिकार आदि के लिए कानूनी दस्तावेज के रूप में विवाह पंजीकरण मान्य है।
बाक्स
रजिस्ट्रार कार्यालय से प्राप्त विवाह पंजीकरण का ब्यौरा
1976 3
1977-80 0
1981 2
1982 1
1983 0
1984 2
1985 3
1986 9
1987 3
1988 3
1989 1
1990 2
1991 1
1992 3
1993 1
1994 2
1995 2
1996 15
1997 5
1998 10
1999 24
2000 18
2001 20
2002 17
2003 15
2004 20
2005 30
2006 39
2007 49
2008 72
2009 115
2010 147
2011 183
2012 179
2013 215
2014 322
2015 390
2016 93 (अब तक)