दो बजते ही बाजार में दुकानों के शटर गिर गए। सब्जी, मेडिकल और अन्य जरूरी चीजों की दुकानें खुली रहीं। दोपहर दो बजे बाद बाजारों में सन्नाटा रहा। लोगों की आवाजाही भी कम रही।
शनिवार को नगर में जरूरी चीजों को छोड़कर अन्य चीजों की दुकानें दोपहर दो बजे तक ही खुलीं। नगर के पल्टन, लाला बाजार, चौक बाजार, कारखाना, कचहरी, धरानौला समेत अन्य बाजारों में दोपहर दो बजे बाद व्यापारियों ने खुद ही दुकानें बंद कर दी थीं। दो बजे बाद भी नगर में सब्जी और अन्य जरूरी चीजों की दुकानें खुली रहीं। दो बजे से पूर्व बाजारों में खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ रही।
दोपहर दो बजे बाद बाजारों में सन्नाटा रहा। अधिकतर लोग सुबह ही खरीदारी करने को पहुंच रहे हैं। बाजार में भीड़ वाले स्थानों पर कई बार सामाजिक दूरी का उल्लंघन हुआ। बागेश्वर में दोपहर बाद बाजार में सन्नाटा पसर रहा है। सुबह से दो बजे तक बाजार गुलजार हो रहे हैं। शाम को जरूरी सामान की दुकान खुलने के बावजूद बाजारों में सुनसानी देखी जा रही है। हालांकि बाजार बंदी के लिए अलग-अलग नियम बनाने को लेकर व्यापारियों में सरकार के प्रति रोष है।
जिले में सुबह से बाजार में सामान खरीदने और जरूरी कार्य निपटाने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। बाजार बंद होने के समय के अनुसार लोगों ने अपनी दिनचर्या भी बदल ली है। अधिकतर लोग सुबह से दोपहर तक बाजार से जरूरी सामान की खरीदारी कर रहे हैं। शाम के समय बाजार में बहुत कम भीड़ देखने को मिल रही है। पुलिस प्रशासन भी लोगों से लगातार बाजार में जरूरी काम से आने की अपील कर रहा है। दोपहर दो बजते ही बाजार में जरूरी सामान की दुकानों को छोड़कर बाकी प्रतिष्ठान बंद हो जाते हैं। (संवाद)
दो नियम से खुश नहीं व्यापारी
बागेश्वर। बाजार बंद करने के लिए दो नियम बनाने से व्यापारी खुश नहीं है। प्रांतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष और हिम होटल के मालिक मनोज अरोड़ा कहते हैं कि अगर कर्फ्यू सात बजे शाम से लगाना है तो दोपहर को दो बजे बाजार बंद करने का कोई औचित्य नहीं है। लोग बाजार में घूम-फिर रहे हैं, ऐसे में कैसे कोरोना से जंग जीती जाएगी। कहा कि इस नियम से अधिकतर दुकानदारों को नुकसान हो रहा है। सभी दुकानें शाम सात बजे तक खोली जानी चाहिए।
बागेश्वर बाजार में दोपहर से पहले की चहल-पहल। संवाद न्यूज एजेंसी- फोटो : BAGESHWAR
अल्मोड़ा में शनिवार को दो बजे से पूर्व बाजार में उमड़ी लोगों की भीड़।- फोटो : ALMORA