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आतंकवाद के सफाए के लिए चौबटिया में युद्धाभ्यास शुरू

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अल्मोड़ा और रानीखेत में युद्धाभ्यास के लिए रानीखेत पहुंचे उज्बेक सैनिक और अधिकारी भारतीय सैन्य - फोटो : RANIKHET
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रानीखेत (अल्मोड़ा)। सामरिक रिश्तों की मजबूती और आतंकवाद के खात्मे को लेकर चौबटिया छावनी में भारत और उज्बेकिस्तान का संयुक्त सैन्य युद्ध अभ्यास डस्टलिक-2 शुरू हो गया है। दोनों देशों के बीच पहला सैन्य अभ्यास ताशकंद में हुआ था। यहां दीवान सिंह हाल में युद्धाभ्यास का शुभारंभ करते हुए दोनों देशों के अधिकारियों ने कहा कि यह अभ्यास दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए मील का पत्थर साबित होगा। युद्धाभ्यास में दोनों देशों के 45-45 सैन्य कर्मी भाग ले रहे हैं।
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आतंकवाद से निपटने के उद्देश्य से दोनों देशों के बीच यह युद्धाभ्यास शुरू हुआ है। इस दौरान दोनों देशों के सैन्य कर्मियों ने अपने-अपने देश के राष्ट्रीय ध्वज फहराए। भारत की तरफ से 13 कुमाऊं रेजीमेंट केंद्र के जवान इस युद्धाभ्यास में शिरकत कर रहे हैं। रेजांग्ला रेजीमेंट के नाम से मशहूर ये रेजीमेंट 1962 के चीन युद्ध में झंडे गाड़ चुकी है। उज्बेकिस्तान से भारत के अच्छे संबंध रहे हैं। पूर्व में दोनों देशों के बीच ताशकंद में युद्धाभ्यास हो चुका है। चौबटिया में दोनों देशों की सेनाएं आतंकवाद से लड़ने की तकनीकें साझा करेंगी।
य़ुद्धाभ्यास के शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि भारतीय सेना के मेजर जनरल एसके मिश्रा ने कहा कि युद्धाभ्यास दोनों देशों के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाएगा। लड़ने की तकनीकों का आदान प्रदान भी होगा। भारतीय फौज को शांतिप्रिय के साथ ही बहादुर भी माना जाता है। वहीं उज्बेकिस्तान सेना के कमांडर कर्नल कोलोनल कामिलोव अजीज ने भी युद्धाभ्यास को भविष्य के लिए शुभ संकेत करार दिया। कर्नल अमित मलिक ने दस दिनों तक चलने वाले इस युद्धाभ्यास के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
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काउंटर सर्च, काउंटर डिस्ट्रॉय, रूम इंटरवेशन का होगा प्रदर्शन
रानीखेत। युद्धाभ्यास के दौरान काउंटर सर्च ऑपरेशन, काउंटर डिस्ट्राय और जंगलिंग फायरिंग का भी प्रदर्शन होगा। कर्नल अमित मलिक ने बताया कि रूम इंटरवेशन के तहत घरों में छिपे आतंकियों को मार गिराने के तकनीक भी साझा की जाएगी। युद्धाभ्यास से पहले ही दोनों देशों के सैन्य अधिकारी और कर्मचारी आपस में पूरी तरह से घुलमिल चुके थे। कुमाऊं रेजीमेंट केंद्र की बैंड की धुन सुनकर उज्बेकिस्तान के सैन्यकर्मी भी मंत्रमुग्ध दिखे। युद्धाभ्यास आतंकवाद और विद्रोह के खिलाफ होगा।
तकनीक के साथ ही संस्कृति का भी होगा आदान प्रदान
रानीखेत। युद्धाभ्यास में जहां दोनों देशों के सैनिक एक दूसरे देशों की तकनीक साझा करेंगे, वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से कल्चर को भी समझने का प्रयास करेंगे। वैलीडेशन एक्सरसाइज के अलावा हेलीबोर्न ऑपरेशन की प्रस्तुति भी दी जाएगी। युद्धाभ्यास का समापन 19 मार्च को वैलीडेशन एक्सरसाइज के साथ होगा। समय-समय पर दोनों देशों की सेनाएं जो भी तकनीक सीखेंगी, उनका प्रदर्शन भी होगा।
उज्बेकिस्तान के साथ भारत के संबंध पुराने रहे हैं। इस युद्धाभ्यास के माध्यम से संबंध और भी प्रगाढ़ होंगे। पूरी दुनियां आतंकवाद से जूझ रही है। काउंटर टेरेजिज्म इस युद्धाभ्यास की थीम होगी। 1991 में उज्बेकिस्तान को आजादी मिली। सबसे पहले बधाई देने वाला देश भारत ही था। भारत के प्रधानमंत्री और उज्बेक के राष्ट्रपति एक दूसरे देशों का दौरा करते रहते हैं। युद्धाभ्यास अवश्य की मील का पत्थर साबित होगा।-मेजर जनरल एसके शर्मा, वीएसएम, जीओसी 22 रेपिड।
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