कुमाऊं की सबसे बड़ी रानीखेत छावनी को स्मार्ट छावनी बनाने की मांग मुखर होने लगी है। उपाध्यक्ष मोहन नेगी के नेतृत्व में सभासदों ने रक्षा मंत्री को ज्ञापन भेजकर कहा है कि अंग्रेजों द्वारा बसाई गई रानीखेत छावनी आजादी के बाद से लगातार समस्याओं से जूझ रही है। कैंट के जटिल कानूनों के चलते दाखिल खारिज, लीज नवीनीकरण, भवन निर्माण के कार्य आसानी से नहीं हो पा रहे हैं।
रक्षा मंत्रालय ने शहरी विकास मंत्रालय की स्मार्ट सिटी के तर्ज पर स्मार्ट छावनी बसाने का निर्णय लिया है। इसी क्रम में सभासदों ने रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर को भेजे ज्ञापन में कहा है कि रानीखेत कैंट की स्थापना 1869 में हुई। अंग्रेज हुक्मरानों ने यहां के विकास के लिए तमाम योजनाएं चलाई, लेकिन आजादी के बाद छावनी के लोग कड़े कानूनों के चलते दोएम दर्जे का जीवन जी रहे हैं।
भवन निर्माण, दाखिल खारिज, लीज नवीनीकरण की अनुमति आसानी से नहीं मिल पाती है। जिस कारण लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। अंग्रेजों ने रानीखेत की खूबसूरत से खुश होकर यहां ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का निर्णय लिया था, लेकिन आजादी के बाद रानीखेत का विकास बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। यदि स्मार्ट छावनी बनती है तो नि:संदेह छावनी क्षेत्र के लोगों को इसका लाभ मिलेगा। ज्ञापन में सभासद संजय पंत, सुकृत शाह, भुवन लाल, अर्चना पाठक, विनोद कुमार, बिंदु रौतेला आदि के हस्ताक्षर मौजूद हैं।